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Karnataka news- धर्मस्थल से नर कंकाल बारामत, हो रही फोरेंसिक जाँच?

By: डिजिटल डेस्क

On: Thursday, August 7, 2025 10:37 PM

Karnataka news
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कर्नाटक के प्रसिद्ध धर्मस्थल क्षेत्र में कथित सामूहिक कब्रों की जांच प्रशासन और समाज के लिए चौंकाने वाला मामला बन गया है। इस संदर्भ में राज्य सरकार ने शंका के आधार पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है जो पिछले कई महीनों से जारी है। जांच टीम ने अभी तक चिह्नित जगहों पर खुदाई करते हुए एक नर कंकाल सहित कई मानव हड्डियां बरामद की हैं। गृह मंत्री डॉ. जी परमेश्वर ने इस जांच की पुष्ट जानकारी देते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।

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पूर्व कर्मचारी के आरोपों से खुलासा

धर्मस्थल के एक पूर्व सफाई कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि 1995 से 2014 के बीच उसे कई शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था, जिनमें महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के कंकाल भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि कुछ शवों पर यौन उत्पीड़न के निशान थे, जबकि कई को सामूहिक रूप से अवैध तरीके से दफनाया गया। इस बड़ा खुलासा स्थानीय समाज में भारी प्रतिक्रिया और चर्चाओं का कारण बना है।

जांच के दौरान मिली सामग्री और सुरक्षा व्यवस्था

विशेष जांच दल ने जंगल के कई स्थानों पर खुदाई की है और अब तक 13 संभावित दफन स्थलों की पहचान की गई है। इनमें से सबसे अधिक संख्या में शव नेत्रावती नदी के किनारे पाए गए हैं। खुदाई के दौरान कंकाल के साथ-साथ एक साड़ी के टुकड़े भी मिले हैं, जो इस मामले की चिंताजनक प्रकृति को दर्शाते हैं। पुलिस ने घटनास्थल पर सुरक्षा बढ़ा दी है और स्थानीय प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है।

राज्य सरकार का रुख और कार्रवाई का आश्वासन

इस मामले पर कर्नाटक के गृह मंत्री डॉ. जी परमेश्वर ने कहा कि मामले की पूर्ण जांच की जा रही है और यदि पता चलता है कि किसी भी तरह से अवैध गतिविधि हुई है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वन मंत्री ईश्वर खांडरे ने भी कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। सरकार ने जांच में पारदर्शिता बनाए रखने का वादा किया है।

स्थानीय और सामाजिक प्रतिक्रिया

धर्मस्थल, जो कि एक प्रमुख तीर्थ स्थल और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में जाना जाता है, इस घटना से बीते समय की छवि पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इस खुलासे से स्थानीय समुदाय में भारी असंतोष और सवाल खड़े हो गए हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग न्याय और सत्य की मांग कर रहे हैं। वहीं जैन समुदाय ने भी आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है और इस मुद्दे का दुरुपयोग न करने की अपील की है।

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