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नया आयकर अधिनियम 2025 लागू अब टैक्स फाइलिंग हुई आसान, बदल गए नियम

By: डिजिटल डेस्क

On: Tuesday, April 7, 2026 3:58 PM

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भारत के मध्यमवर्गीय करदाताओं और व्यापारियों के लिए 1 अप्रैल 2026 की तारीख एक बड़े प्रशासनिक बदलाव की गवाह बनी है। केंद्र सरकार ने 64 साल पुराने ‘आयकर अधिनियम 1961′ को पूरी तरह समाप्त कर ‘नया आयकर अधिनियम 2025’ लागू कर दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य जटिल कानूनी भाषा को सरल बनाना और टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह सुधार केवल कागजी नहीं है, बल्कि इससे आम नागरिक के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ बढ़ेगी।

कानून का सरलीकरण 819 से घटकर रह गई 536 धाराएं

पुराने आयकर अधिनियम में दशकों से हो रहे संशोधनों के कारण वह काफी जटिल और भारी-भरकम हो गया था। नए अधिनियम में इस जटिलता को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं:

  • धाराओं में कटौती: अब आयकर अधिनियम में धाराओं की संख्या 819 से घटाकर मात्र 536 कर दी गई है। अनावश्यक और पुराने पड़ चुके प्रावधानों को हटा दिया गया है।
  • नियमों और फॉर्म्स का विलय: आयकर नियमों की संख्या भी 511 से घटाकर 333 कर दी गई है। साथ ही, पहले प्रचलित 399 विभिन्न फॉर्म्स की जगह अब केवल 190 फॉर्म्स ही प्रभावी रहेंगे।
  • टैक्स ईयर (Tax Year) का जन्म: अब ‘असेसमेंट ईयर’ (AY) और ‘प्रीवियस ईयर’ (FY) का भ्रम खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह अब केवल ‘टैक्स ईयर’ शब्द का इस्तेमाल होगा, जिससे करदाताओं को यह समझने में आसानी होगी कि वे किस वर्ष की कमाई पर टैक्स दे रहे हैं।

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नौकरीपेशा के लिए बड़ा बदलाव फॉर्म 16 का बदला नाम

वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उनके टीडीएस (TDS) सर्टिफिकेट को लेकर है। अब तक जिसे आप ‘फॉर्म 16’ के नाम से जानते थे, नए कानून के तहत उसका नाम बदलकर अब ‘फॉर्म 130’ कर दिया गया है।

  • क्या बदलेगा: फॉर्म 130 अब तीन भागों (Part A, B और C) में विभाजित होगा, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक विशेष अनुबंध (Annexure) भी जोड़ा गया है। यह नया फॉर्म पहले से अधिक विस्तृत होगा और सिस्टम द्वारा ऑटो-जेनरेटेड होगा, जिससे डेटा मिसमैच की समस्या खत्म हो जाएगी।

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डिजिटल कंप्लायंस और पारदर्शिता पर जोर

नए अधिनियम के तहत अब आयकर विभाग पूरी तरह ‘फेसलेस’ और ‘डेटा ड्रिवेन’ मोड में काम करेगा। 1 अप्रैल 2026 से सभी टैक्स नोटिस और रिफंड की प्रक्रिया इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत संचालित होगी। सरकार का दावा है कि इस नए ऊंचे दर्जे के सरलीकरण से कानूनी विवादों (Litigations) में भारी कमी आएगी क्योंकि कानूनों की व्याख्या अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और सीधी है।

करदाताओं के लिए जरूरी सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि टैक्स स्लैब और दरों में इस कानून के कारण कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन शब्दावली और सेक्शन नंबर पूरी तरह बदल गए हैं। इसलिए, अब निवेश के दावों (जैसे 80C या 80D) के लिए आपको नए अधिनियम के संगत अनुभागों (जैसे चैप्टर VIII) का संदर्भ देना होगा। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने नियोक्ता (Employer) से नए फॉर्म 124 (जो पुराने फॉर्म 12BB की जगह आया है) के माध्यम से अपने निवेश की घोषणा समय पर कर दें।

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