सीधी (मध्यप्रदेश) | 10 अप्रैल, 2026-लोकतंत्र में जनता जनार्दन होती है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद जन प्रतिनिधियों के तेवर कैसे बदल जाते हैं, इसकी एक बानगी मध्यप्रदेश के सीधी जिले में देखने को मिली। यहाँ के भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपने क्षेत्र की एक महिला को फटकार लगाते नजर आ रहे हैं। मामला तब बिगड़ा जब महिला ने चुनाव पूर्व किए गए वादों सड़क, बिजली और पानी का हिसाब मांग लिया।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, सांसद डॉ. राजेश मिश्रा एक सार्वजनिक कार्यक्रम या जनसंपर्क के दौरान जनता के बीच पहुंचे थे। इसी दौरान एक स्थानीय महिला ने उन्हें रोक लिया और उनके वादों की याद दिलाई। महिला ने कहा, “सांसद जी, आपने वोट मांगते समय कहा था कि गाँव में सड़क बनवाएंगे, बिजली और पानी की व्यवस्था करेंगे, लेकिन जीतने के बाद आप सब भूल गए। अभी तक कुछ नहीं हुआ।”
नाबालिग निकली मोनालिसा रद्द होगी शादी पॉस्को में मामला दर्ज केरल DGP दिल्ली तलब!
इतना सुनते ही सांसद महोदय का पारा चढ़ गया। जनसमस्या सुनने के बजाय उन्होंने महिला को बीच में ही टोकते हुए सख्त लहजे में कहा “तुम चुप रहो पहले!” सांसद के इस व्यवहार से वहां मौजूद लोग सन्न रह गए।
वीडियो बनाने वाले पर भी बरसे सांसद
सांसद का गुस्सा यहीं नहीं थमा। जब उनकी नजर वहां मौजूद एक युवक पर पड़ी जो इस पूरी घटना का मोबाइल से वीडियो बना रहा था, तो वे उस पर भी भड़क उठे। उन्होंने युवक को धमकाते हुए कहा, “तुम वीडियो बना रहे हो?” सांसद की डांट और तेवर देखकर युवक डर गया और उसने तुरंत अपना मोबाइल कैमरा बंद कर दिया। हालांकि, तब तक घटना का एक हिस्सा रिकॉर्ड हो चुका था, जो अब ‘विकास के दावों’ की पोल खोल रहा है।
सोना खरीदने वालों की हुई मौज! ₹1.51 लाख पर स्थिर हुई कीमतें, अक्षय तृतीया से पहले गिरेगा भाव?”
विकास के वादों पर पहले भी रहे हैं विवाद
यह पहली बार नहीं है जब सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा अपने बयानों या व्यवहार को लेकर चर्चा में आए हों। इससे पहले भी खड्डी खुर्द गांव की खराब सड़कों और गर्भवती महिलाओं की समस्याओं पर उनके बयानों को लेकर काफी विवाद हुआ था। ताजा घटना ने एक बार फिर जनता और जनप्रतिनिधि के बीच बढ़ती दूरी को उजागर कर दिया है।
विपक्ष का हमला
वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि सत्ता के नशे में चूर नेता अब जनता के प्रति जवाबदेही भूल चुके हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग पूछ रहे हैं कि क्या लोकतंत्र में विकास का सवाल पूछना अब गुनाह हो गया है?







