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अलविदा ‘स्वरांगिनी’ 92 वर्षीय आशा भोसले का निधन, आज मुंबई में राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

By: डिजिटल डेस्क

On: Monday, April 13, 2026 1:47 PM

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मुंबई भारतीय संगीत जगत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। अपनी जादुई आवाज़ से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली महान गायिका आशा भोसले ने सोमवार को 92 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली, जहाँ वे पिछले कुछ दिनों से भर्ती थीं। डॉक्टरों के अनुसार, उनके निधन की मुख्य वजह ‘मल्टीपल ऑर्गन फेलियर’ (कई अंगों का काम करना बंद कर देना) रही।

यह खबर आते ही न केवल बॉलीवुड, बल्कि पूरे देश और दुनिया भर में फैले उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित खेल और सिनेमा जगत की हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

आज होगा अंतिम संस्कार

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, आशा भोसले के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके पेडर रोड स्थित आवास ‘प्रभु कुंज’ में रखा जाएगा। दोपहर बाद उनकी अंतिम यात्रा शुरू होगी। मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर आज शाम राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार ने उनके सम्मान में राजकीय शोक की घोषणा की है।

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सात दशकों का सुरीला सफर: एक नजर में

8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मी आशा भोसले संगीत के दिग्गज पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और ‘स्वर कोकिला’ दिवंगत लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। उन्होंने अपना पहला गीत 1943 में गाया था। तब से लेकर अब तक उन्होंने हिंदी सहित 20 से अधिक भारतीय और विदेशी भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए।

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  • गिनीज बुक रिकॉर्ड: 2011 में, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें संगीत के इतिहास में सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग (गाने) करने वाली कलाकार के रूप में आधिकारिक तौर पर मान्यता दी थी।
  • सम्मान: उन्हें भारत सरकार द्वारा 2000 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। वे दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीत चुकी थीं।

उनकी आवाज़ की बहुमुखी प्रतिभा (Versatility) ऐसी थी कि उन्होंने भजन, गज़ल, कव्वाली से लेकर पॉप और कैबरे गानों को समान सहजता से गाया। ‘दम मारो दम’, ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’, और ‘इन आँखों की मस्ती के’ जैसे हजारों गीत आज भी अमर हैं।

आशा भोसले का निधन भारतीय संस्कृति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी आवाज़ हमेशा हमारे बीच गूंजती रहेगी।

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