नई दिल्ली/नोएडा | 13 अप्रैल, 2026 राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सोमवार को औद्योगिक अशांति का एक बड़ा सैलाब देखने को मिला। नोएडा, पलवल और फरीदाबाद जैसे प्रमुख औद्योगिक हब में हजारों कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। नोएडा में एक मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के बाहर प्रदर्शन हिंसक हो गया, जबकि पलवल और फरीदाबाद में शांतिपूर्ण लेकिन व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए।
नोएडा: कंपनी के बाहर हिंसा और तोड़फोड़
नोेजिया के सेक्टर 63 स्थित एक बड़ी मोबाइल कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी के बाहर सुबह सैकड़ों कर्मचारी जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने बिना पूर्व सूचना के कई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया और पिछले दो महीने का वेतन भी नहीं दिया।
बातचीत विफल होने पर प्रदर्शन उग्र हो गया। गुस्साए कर्मचारियों ने कंपनी के गेट पर पथराव किया, सुरक्षा गार्डों के केबिन को निशाना बनाया और बाहर खड़ी कुछ गाड़ियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा। पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। नोएडा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “तोड़फोड़ और हिंसा के आरोप में लगभग 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है। स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन एहतियातन पुलिस बल तैनात है।”
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पलवल और फरीदाबाद: हजारों का जनसैलाब
नोएडा से इतर, हरियाणा के पलवल और फरीदाबाद जिलों में औद्योगिक क्षेत्र पूरी तरह ठप रहे। यहाँ श्रमिक संघों के आह्वान पर हजारों कर्मचारी हड़ताल पर चले गए और सड़कों पर जुलूस निकाला।
फरीदाबाद के सेक्टर 24-25 औद्योगिक क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण लेकिन शांतिपूर्ण रहा। प्रदर्शनकारी न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर ₹26,000 प्रति माह करने, नए श्रम कानूनों को वापस लेने और सभी अनुबंध (Contract) कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग कर रहे थे।
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पलवल में भी बड़ी संख्या में ऑटोमोबाइल सेक्टर के कर्मचारी दिल्ली-मथुरा नेशनल हाईवे के किनारे जमा हुए। श्रमिक नेताओं का आरोप है कि कंपनियाँ श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं और बढ़ती महंगाई के बावजूद वेतन में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।
NCR के औद्योगिक क्षेत्र पर असर
सोमवार को हुए इन विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली-NCR के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन पर व्यापक असर पड़ा। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, केवल नोएडा और फरीदाबाद में एक दिन की हड़ताल से लगभग ₹150 करोड़ से अधिक के टर्नओवर का नुकसान हुआ है। औद्योगिक संगठनों ने चिंता जताई है कि यदि श्रमिक अशांति जारी रहती है, तो इससे उत्पादन और निर्यात के ऑर्डर प्रभावित होंगे। प्रशासन ने सभी पक्षों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, लेकिन श्रमिक संगठनों का कहना है कि ठोस आश्वासन के बिना आंदोलन जारी रहेगा।







