नई दिल्ली: देश की नजरें भले ही बजट 2026 पर टिकी हों, लेकिन उससे पहले ही आज से कुछ अहम नियमों में बदलाव लागू हो गए हैं। ये बदलाव सीधे-सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं, चाहे वह बैंकिंग हो, डिजिटल पेमेंट, ट्रैवल या जरूरी सेवाएं। सरकार और नियामक संस्थाएं अक्सर महीने की पहली तारीख से नए नियम लागू करती हैं, ताकि सिस्टम में साफ-सुथरा ट्रांजिशन हो सके। इस बार भी कुछ ऐसे फैसले सामने आए हैं, जिनका असर हर घर तक महसूस होगा।
बैंकिंग से जुड़े नियम: खाते और सेवाओं पर असर
आज से कई बैंकों में केवाईसी अपडेट, न्यूनतम बैलेंस और डिजिटल सेवाओं से जुड़े नियमों में बदलाव प्रभावी हो गए हैं। सार्वजनिक और निजी दोनों सेक्टर के बैंक ग्राहकों को SMS/ईमेल के जरिए सूचित कर रहे हैं कि जिन खातों में लंबे समय से अपडेट नहीं हुआ है, वहां लेन-देन पर सीमाएं लग सकती हैं। इसका मकसद धोखाधड़ी रोकना और सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बनाना बताया जा रहा है।
ग्राहकों के लिए सीख साफ है, अगर आपने अभी तक दस्तावेज अपडेट नहीं किए हैं, तो शाखा या आधिकारिक ऐप के जरिए प्रक्रिया पूरी कर लें।
डिजिटल पेमेंट: UPI यूजर्स के लिए नई व्यवस्था
डिजिटल इंडिया की रफ्तार के साथ UPI और वॉलेट्स के नियम भी समय-समय पर सख्त होते रहते हैं। आज से कुछ प्लेटफॉर्म्स पर इनएक्टिव नंबरों से जुड़े UPI आईडी को लेकर सख्ती बढ़ी है। नियामकों का तर्क है कि लंबे समय तक इस्तेमाल न होने वाले नंबर साइबर फ्रॉड का जोखिम बढ़ाते हैं।
हालांकि, नियमित यूजर्स पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जिनका नंबर बदला है या लंबे समय से UPI इस्तेमाल नहीं हुआ, उन्हें प्रोफाइल वेरिफिकेशन दोबारा करना पड़ सकता है।
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ट्रैवल और टोल: हाईवे पर सफर होगा अलग
हाईवे पर सफर करने वालों के लिए टोल सिस्टम से जुड़े नियमों में भी बदलाव दिख रहा है। टोल एजेंसियां केवाईसी-आधारित फास्टैग मैनेजमेंट को प्राथमिकता दे रही हैं, ताकि गलत चार्ज और डुप्लिकेट टैग की समस्या कम हो। जिन वाहन मालिकों ने समय रहते टैग अपडेट नहीं किया, उन्हें रिचार्ज या एंट्री पर दिक्कत आ सकती है।
यह कदम यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए बताया जा रहा है, लेकिन शुरुआती दिनों में थोड़ी असुविधा संभव है।
जरूरी सेवाएं और कीमतें: जेब पर नजर
हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी, एटीएफ और कुछ उपभोक्ता सेवाओं की कीमतों की समीक्षा होती है। आज से नई दरें लागू होने के चलते घर के बजट पर हल्का-फुल्का असर दिख सकता है। हालांकि, यह बदलाव बाजार स्थितियों पर निर्भर करता है और हर बार बढ़ोतरी ही हो, ऐसा जरूरी नहीं।
उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे आधिकारिक रेट लिस्ट देखें और अफवाहों से बचें।







