Vande Mataram national song history- भारत की स्वतंत्रता संग्राम की कथा में यदि कोई गीत सबसे अधिक आत्मा को झकझोरने वाला था, तो वह “वंदे मातरम्” ही था। इसे बंगाल के प्रसिद्ध लेखक और विचारक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने सन् 1875 में रचा था। उस दौर में जब भारत अंग्रेजी शासन की जकड़ में था और स्वतंत्रता का सपना देखना भी कठिन माना जाता था, उसी समय यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के मन में आशा, साहस और एकता की भावना जगाने का माध्यम बना। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसका सृजन अपने प्रसिद्ध उपन्यास “आनंदमठ” में किया, जो सन् 1882 में प्रकाशित हुआ।
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बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय केवल साहित्यकार नहीं, बल्कि समाज सुधारक और राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रतिनिधि थे। उनका जन्म 26 जून 1838 को पश्चिम बंगाल के नाइहाटी में हुआ था। वे ब्रिटिश शासन के दौरान उस युग के पहले भारतीयों में से थे जिन्होंने प्रशासनिक नौकरी (डिप्टी मजिस्ट्रेट) हासिल की। परंतु अंग्रेजी शासन के अत्याचारों ने उनके भीतर प्रतिरोध की भावना जगाई। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज में आत्मगौरव और भारतमाता के प्रति श्रद्धा का प्रसार किया। “आनंदमठ” उनके साहित्यिक कर्म का शिखर माना गया, जिसमें संन्यासी विद्रोह के माध्यम से उन्होंने औपनिवेशिक दमन के खिलाफ संघर्ष की प्रतीकात्मक कथा कही।
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उग्र रूप की अद्भुत अभिव्यक्ति
“वंदे मातरम्” गीत में बंकिम चंद्र ने भारत को मां का स्वरूप दिया—जो एक ओर स्नेह, करुणा और समृद्धि का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर अपने पुत्रों की रक्षा के लिए उग्र और शक्तिशाली भी। उन्होंने यह दिखाया कि भारत सिर्फ भूमि नहीं, बल्कि एक जीवंत शक्ति है। इस गीत के भावों में गंगा, यमुना, पर्वत, वन और फसलों की हरियाली से भरी धरती का अद्भुत चित्रण है। इससे न केवल भौगोलिक सौंदर्य प्रकट होता है, बल्कि देश के सांस्कृतिक वैभव और मातृभूमि की पवित्रता का भी बोध होता है।






