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डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा, न्यायपालिका का कड़ा संदेश

By: डिजिटल डेस्क

On: Tuesday, April 7, 2026 12:54 PM

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मदुरै (तमिलनाडु)। Madurai की एक अदालत ने देश को झकझोर देने वाले सथानकुलम कस्टोडियल डेथ मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 9 दोषी पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में रखते हुए कहा कि कानून के रखवालों द्वारा किया गया यह कृत्य समाज के विश्वास को तोड़ने वाला है।

यह मामला वर्ष 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान Sathankulam में सामने आया था। पी. जयराज (59) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) को दुकान देर तक खुली रखने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि थाने में दोनों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, जिससे गंभीर चोटों के कारण कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो गई।

क्या हुआ था उस रात?

19 जून 2020 को हुई इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह सामने आया कि दोनों को बेरहमी से पीटा गया। यह मामला सोशल मीडिया और राष्ट्रीय मीडिया में व्यापक रूप से उठा, जिसके बाद न्याय की मांग तेज हो गई।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी गई। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने 23 मार्च 2026 को सभी आरोपियों को हत्या, साजिश और सबूत मिटाने के अपराध में दोषी करार दिया था।

अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह सिर्फ दो व्यक्तियों की हत्या नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग का घिनौना उदाहरण है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के अपराधों में नरमी बरतना समाज के प्रति अन्याय होगा। इसलिए दोषियों को मृत्युदंड दिया गया।

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कस्टोडियल डेथ चिंताजनक स्थिति

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, भारत में 2020-21 से 2021-22 के बीच करीब 4,484 कस्टोडियल डेथ के मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा पुलिस और न्यायिक व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

फैसले का व्यापक प्रभाव

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एक मिसाल कायम करेगा। पुलिस हिरासत में होने वाले अत्याचारों पर अंकुश लगाने के लिए यह निर्णय एक मजबूत संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।

इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित किया है कि न्यायपालिका नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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