गोरखपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। चौरी-चौरा थाना क्षेत्र की रहने वाली 9वीं कक्षा की एक 14 वर्षीय छात्रा, जो पिछले वर्ष नवंबर से लापता थी, पुलिस द्वारा बरामद किए जाने के बाद उसने आपबीती सुनाई तो सबकी रूह कांप गई। छात्रा के साथ अलग-अलग जगहों और होटलों में ले जाकर 10 लोगों ने बार-बार सामूहिक दुष्कर्म किया।
नवंबर 2025 से लापता थी किशोरी
घटना की शुरुआत 1 नवंबर 2025 को हुई, जब छात्रा रोज की तरह स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। छात्रा के घर में मां की मृत्यु हो चुकी है और उसके पिता गुजरात में रहकर मजदूरी करते हैं। घर पर उसकी देखभाल करने वाला कोई ठोस सहारा नहीं था। पिता की तहरीर पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर तलाश शुरू की थी।
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4 महीने का नर्क और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने 23 मार्च 2026 को सर्विलांस और मुखबिरों की सूचना पर छात्रा को एक स्थानीय होटल से बरामद किया। बरामदगी के बाद जब छात्रा ने कोर्ट के समक्ष धारा 164 के तहत अपने बयान दर्ज कराए, तो उसने बताया कि कैसे उसे बहला-फुसलाकर अगवा किया गया और फिर उसे एक सामान की तरह एक-दूसरे को सौंपा गया।
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मुख्य अपडेट और गिरफ्तारियां:
- होटल संचालक की गिरफ्तारी: पुलिस ने इस मामले में लापरवाही बरतने और अपराध को बढ़ावा देने के आरोप में होटल ‘मधुवन’ के संचालक धर्मराज यादव को गिरफ्तार किया है।
- 10 आरोपी गिरफ्तार: पुलिस ने अब तक मुख्य आरोपी मनीष राजभर (ऑटो चालक) समेत कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 4 को जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य से पूछताछ जारी है।
- गैंगरेप का जाल: जांच में सामने आया कि एक आरोपी की पत्नी (निशा चौहान) ने भी छात्रा पर दबाव बनाया और उसे अन्य लोगों के पास भेजने में संलिप्त रही।
आंकड़ों में घटना की गंभीरता
| विवरण | तथ्य |
| किशोरी की आयु/कक्षा | 14 वर्ष, कक्षा 9 |
| लापता होने की तिथि | 1 नवंबर, 2025 |
| बरामदगी की तिथि | 23 मार्च, 2026 |
| कुल आरोपी | 10 (जिसमें होटल संचालक भी शामिल) |
| प्रमुख थाना | चौरी-चौरा, गोरखपुर |
प्रशासन का रुख
गोरखपुर पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और गैंगरेप की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। होटल को सील कर दिया गया है और प्रशासन ने इस मामले में स्पीडी ट्रायल की सिफारिश की है ताकि पीड़िता को जल्द न्याय मिल सके। यह मामला न केवल पुलिस की सतर्कता पर सवाल उठाता है, बल्कि समाज में अकेले रह रहे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।







