होम Best Offer लाइफस्टाइल नेशनल न्यूज मध्य प्रदेश लोकल न्यूज टेक्नोलॉजी बिजनेस अन्य
Latest news

Holashtak shubh karya 2026- 24 फरवरी से 3 मार्च तक क्यों नहीं होते विवाह और शुभ कार्य? जानें क्या करें और क्या नहीं.

By: विकाश विश्वकर्मा

On: Friday, February 13, 2026 10:19 AM

holashtak 2026 date in india
Google News
Follow Us
---Advertisement---

हिंदू पंचांग के अनुसार होलाष्टक 2026 की अवधि 24 फरवरी से 3 मार्च तक मानी जा रही है। यह समय फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक रहता है, यानी होली से ठीक पहले के आठ दिन। भारत के अधिकांश हिस्सों में इन आठ दिनों के दौरान विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य टाल दिए जाते हैं। सवाल यही है आख़िर क्यों?

Angrakhaa kurta gheredaar design- फेस्टिव सीज़न का सुपरहिट आउटफिट के 4 लेटेस्ट लुक, जब परंपरा बने फैशन स्टेटमेंट.

होलाष्टक क्यों माना जाता है अशुभ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक के दौरान आठ ग्रहों की स्थिति अस्थिर मानी जाती है। परंपरा कहती है कि इन दिनों ग्रहों की उग्रता बढ़ जाती है, जिससे नए और बड़े निर्णयों के लिए समय अनुकूल नहीं रहता। यही कारण है कि शास्त्रों में इस अवधि को शुभ कार्यों से विराम का समय कहा गया है।

यह मान्यता केवल भय या परंपरा पर आधारित नहीं, बल्कि समय-चक्र के संतुलन से जुड़ी है। भारतीय संस्कृति में हर पर्व के पहले एक ‘ठहराव’ होता है, जहां आत्मचिंतन, संयम और तैयारी पर ज़ोर दिया जाता है। होलाष्टक वही ठहराव है।

भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ा अर्थ

होलाष्टक का संबंध होलिका दहन की पौराणिक कथा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इन आठ दिनों में भक्त प्रह्लाद को अनेक कष्ट दिए गए थे। यह समय संघर्ष, परीक्षा और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में विवाह जैसे उल्लासपूर्ण संस्कारों को टालकर, लोग इस अवधि को साधना और संयम में बिताते हैं।

India-USA Trade Deal Protest- इंडिया-USA ट्रेड डील के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसान, क्या है परेशानी?

क्या-क्या नहीं करना चाहिए?

भारत में परंपरागत रूप से होलाष्टक के दौरान ये कार्य नहीं किए जाते:

  • विवाह और सगाई

  • गृहप्रवेश

  • नया व्यापार या वाहन खरीद

  • मुंडन संस्कार

हालांकि, दैनिक जीवन के सामान्य कार्य और पहले से चल रहे काम बाधित नहीं होते।

क्या करना शुभ माना जाता है?

जहां मांगलिक कार्य रोके जाते हैं, वहीं भक्ति और दान को बढ़ावा दिया जाता है। इस दौरान:

  • जप-तप और पूजा

  • जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान

  • घर की सफाई और होली की तैयारी

इन सबको सकारात्मक और फलदायी माना जाता है। यह समय बाहरी उत्सव से पहले अंतरात्मा की तैयारी का है।

विकाश विश्वकर्मा

नमस्कार! मैं विकाश विश्वकर्मा हूँ, एक फ्रीलांस लेखक और ब्लॉगर। मेरी रुचि विभिन्न विषयों पर लिखने में है, जैसे कि प्रौद्योगिकी, यात्रा, और जीवनशैली। मैं अपने पाठकों को आकर्षक और जानकारीपूर्ण सामग्री प्रदान करने का प्रयास करता हूँ। मेरे लेखन में अनुभव और ज्ञान का मिश्रण होता है, जो पाठकों को नई दृष्टि और विचार प्रदान करता है। मुझे उम्मीद है कि मेरी सामग्री आपके लिए उपयोगी और रोचक होगी।
For Feedback - Feedback@shopingwoping.com.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now
Slide Up
x