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Mardaani 3 review में जानिए कैसे रानी मुखर्जी की दमदार परफॉर्मेंस और रियलिस्टिक कहानी फिल्म को बनाती है खास 

By: विकाश विश्वकर्मा

On: Friday, January 30, 2026 10:14 PM

Bollywood Movie Review
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Mardaani 3 सिर्फ Mardaani फ्रैंचाइज़ की अगली कड़ी नहीं है, बल्कि यह उस सिनेमाई सोच का विस्तार है जिसने भारतीय मुख्यधारा सिनेमा में महिला-केन्द्रित पुलिस कहानियों को गंभीरता से स्थापित किया। इस बार रानी मुखर्जी एक बार फिर शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में लौटती हैं और यह वापसी सिर्फ एक्शन के लिए नहीं, बल्कि सिस्टम से सीधे सवाल पूछने के लिए है।

कहानी: अपराध से आगे, व्यवस्था पर वार

Mardaani 3 की कहानी इस बार केवल एक अपराध को पकड़ने तक सीमित नहीं रहती। फिल्म संगठित अपराध, डिजिटल ट्रैफिकिंग और सत्ता-संरक्षित अपराधियों की उस परत को खोलती है, जिस पर आमतौर पर सिनेमा चुप रहता है। कहानी की खासियत यह है कि यह “हीरो बनाम विलेन” के सरल ढांचे से निकलकर संस्थागत विफलता को असली प्रतिद्वंद्वी बनाती है। यही दृष्टिकोण इसे पहले दो भागों से अलग और अधिक प्रासंगिक बनाता है।

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रानी मुखर्जी का अभिनय: उम्र नहीं, अनुभव बोलता है

रानी मुखर्जी का अभिनय Mardaani 3 की सबसे बड़ी ताकत है। यहां वह न तो ग्लैमर पर निर्भर हैं, न ही ओवर-ड्रैमेटिक संवादों पर। उनकी आंखों की थकान, आवाज़ में सख्ती और बॉडी लैंग्वेज में ठहराव सब कुछ बताता है कि शिवानी अब सिर्फ एक पुलिस ऑफिसर नहीं, बल्कि वर्षों की लड़ाइयों से निकली एक अनुभवी योद्धा है। यह परफॉर्मेंस “लाउड फीमेल लीड” नहीं, बल्कि शांत लेकिन खतरनाक ताकत का उदाहरण है।

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निर्देशन और टोन यथार्थवादी, असहज और असरदार

निर्देशन का टोन जानबूझकर असहज रखा गया है। बैकग्राउंड म्यूज़िक कम है, कैमरा कई बार स्थिर रहता है और हिंसा को ग्लोरिफाई नहीं किया गया। यह फिल्म आपको सीट से उछालने के बजाय अंदर तक बेचैन करती है और यही इसकी सबसे बड़ी जीत है। निर्देशक ने साफ तौर पर यह समझा है कि Mardaani जैसी फिल्मों में संवेदनशीलता, स्टाइल से ज्यादा जरूरी है।

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सहायक किरदार और विलेन कहानी के औज़ार, शोपीस नहीं

फिल्म का विलेन कोई कैरिकेचर नहीं, बल्कि एक ठंडे दिमाग वाला अपराधी है जो सिस्टम की कमज़ोरियों का फायदा उठाता है। सहायक किरदार चाहे पुलिस टीम हो या पीड़ित पक्ष सिर्फ कहानी आगे बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि नैरेटिव को विश्वसनीय बनाने के लिए मौजूद हैं। यह संतुलन आज के कमर्शियल सिनेमा में दुर्लभ है।

संदेश और प्रभाव: बिना भाषण के सामाजिक टिप्पणी

Mardaani 3 उपदेश नहीं देती, लेकिन सवाल छोड़ जाती है क्या न्याय सिर्फ बहादुरी से मिलता है, या सिस्टम बदलना उससे भी बड़ी लड़ाई है? फिल्म का यही पक्ष इसे एक साधारण क्राइम थ्रिलर से ऊपर उठाकर सामाजिक विमर्श में बदल देता है।

फाइनल वर्ड

अगर आप मसालेदार एंटरटेनमेंट की तलाश में हैं, तो Mardaani 3 शायद आपको चौंकाए। लेकिन अगर आप ऐसा सिनेमा चाहते हैं जो डराए, सोचने पर मजबूर करे और महिला-शक्ति को बिना शोर के परिभाषित करे तो यह फिल्म देखी जानी चाहिए।Mardaani 3 साबित करती है कि गंभीर, महिला-प्रधान फिल्में सिर्फ ज़रूरी नहीं, बल्कि व्यावसायिक और कलात्मक रूप से भी प्रासंगिक हैं।

विकाश विश्वकर्मा

नमस्कार! मैं विकाश विश्वकर्मा हूँ, एक फ्रीलांस लेखक और ब्लॉगर। मेरी रुचि विभिन्न विषयों पर लिखने में है, जैसे कि प्रौद्योगिकी, यात्रा, और जीवनशैली। मैं अपने पाठकों को आकर्षक और जानकारीपूर्ण सामग्री प्रदान करने का प्रयास करता हूँ। मेरे लेखन में अनुभव और ज्ञान का मिश्रण होता है, जो पाठकों को नई दृष्टि और विचार प्रदान करता है। मुझे उम्मीद है कि मेरी सामग्री आपके लिए उपयोगी और रोचक होगी।
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