भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने देश के लाखों मजदूरों और कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। चार नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) को लागू करने की घोषणा के साथ ही काम के घंटे, ओवरटाइम और वेतन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इस फैसले का सीधा असर फैक्ट्री मजदूरों से लेकर निजी क्षेत्र के कर्मचारियों तक पर पड़ेगा और सबसे अहम बात, इससे “काम का सम्मान” और “जीवन का संतुलन” दोनों मजबूत होंगे।
क्या हैं चार नई श्रम संहिताएं?
सरकार ने पुराने और बिखरे हुए श्रम कानूनों को सरल बनाने के लिए चार कोड लागू किए हैं-
- वेतन संहिता (Code on Wages)
- औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code)
- सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code)
- व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता (OSH Code)
इनका मकसद नियमों को एकसार करना, श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित करना और नियोक्ताओं के लिए भी प्रक्रिया को स्पष्ट बनाना है।
ओवरटाइम पर दोगुना वेतन: मजदूरों के लिए सबसे बड़ी राहत
नई श्रम संहिताओं के तहत अगर कोई कर्मचारी तय समय से अधिक काम करता है, तो उसे ओवरटाइम के बदले दोगुना वेतन देना अनिवार्य होगा। अब तक कई सेक्टरों में ओवरटाइम का भुगतान अस्पष्ट या कम होता था, जिससे मजदूरों को नुकसान उठाना पड़ता था।
सरकार का यह कदम खास तौर पर मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और गिग इकॉनमी में काम करने वाले लोगों के लिए राहत लेकर आया है।
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हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं
नए नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकेगा। यानी औसतन रोज़ 8 घंटे का कार्यदिवस तय होगा। हालांकि कुछ सेक्टरों में शिफ्ट सिस्टम के तहत लचीलापन दिया जा सकता है, लेकिन कुल साप्ताहिक सीमा का पालन जरूरी होगा।
यह बदलाव सिर्फ कानून नहीं, बल्कि कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला माना जा रहा है।







