फैशन और बॉलीवुड की जगमगाती हस्ती ममता कुलकर्णी इन दिनों एक बड़े सोशल और सांस्कृतिक विवाद के बीच में हैं। खबर है कि उन्हें किन्नर अखाड़ा से निष्कासित कर दिया गया है, और वजह बनी उनकी एक टिप्पणी जिसमें उन्होंने जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बारे में कहा था।
इस लेख में हम सरल भाषा में इस पूरे विवाद को समझेंगे -क्या कहा गया, क्यों यह चर्चा में है, और आगे क्या संभावित असर हो सकता है।
किन्नर अखाड़ा क्या है?
किन्नर अखाड़ा हिंदू धर्म की एक पारंपरिक संस्था है, जो धार्मिक आचार, तंथ्रिक पूजा-विधि और अखाड़ों की परंपरा में शामिल है। ये समुदाय धार्मिक आयोजनों, मेले और दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।
किन्नर अथवा ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े अखाड़ों का इतिहास और आदर भारतीय संस्कृति में कई शताब्दियों पुराना है – लेकिन यह भी सच है कि इन्हें आज भी कई सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
विवाद की शुरुआत: ममता की टिप्पणी
समाचार एजेंसियों और सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रही रिपोर्टों के मुताबिक़, ममता कुलकर्णी ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर टिप्पणी की थी।
उस टिप्पणी के मुख्य बिंदु ये रहे:
- ममता ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कुछ विचारों पर स्पष्ट असहमति जताई।
- उन्होंने कहा कि कुछ पारंपरिक विचार आज के समाज के दृष्टिकोण से पुनर्विचार योग्य हैं।
- खासकर ट्रांसजेंडर समुदाय और उनके धार्मिक अखाड़ों के बारे में बयान देते हुए ममता ने समावेशिता की बात कही।
ख़ास बात यह है कि उन्होंने किसी का अपमान नहीं किया, लेकिन उनके शब्दों को कुछ धार्मिक विद्वानों ने अपमानजनक बताया।
अखाड़े ने क्यों लिया निष्कासन जैसा कदम?
किन्नर अखाड़ा के सदस्यों का कहना है कि ममता के शब्दों ने उनके धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाई। अखाड़ा परिषद के एक वरिष्ठ सदस्य ने मीडिया से कहा:
“यह टिप्पणी हमारे धार्मिक नेतृत्व और हमारे समुदाय की गरिमा पर सवाल उठाती है।”
इसके बाद अखाड़ा परिषद ने ममता कुलकर्णी को अनौपचारिक रूप से निष्कासित कर दिया- यानी अब उन्हें अखाड़े के धार्मिक आयोजनों तथा बैठकों में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यह कदम उस समय और अधिक चर्चा में आया जब कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और ट्रांसजेंडर अधिकार समूहों ने इस फैसले पर सवाल उठाए।







