प्रयागराज कुंभ के दौरान अपनी खूबसूरती और रुद्राक्ष बेचते हुए वीडियो से चर्चा में आई ‘कुंभ वायरल गर्ल’ मोनालिसा भोंसले की शादी के मामले में एक ऐसा सनसनीखेज मोड़ आया है, जिसने कानून और प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की सघन जांच में यह पुष्टि हुई है कि जिस समय केरल में मोनालिसा और फरमान खान की शादी हुई, उस वक्त मोनालिसा कानूनन नाबालिग थी। इस खुलासे के बाद अब आरोपी फरमान खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं और उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।
कैसे बेनकाब हुआ उम्र का झूठ?
पिछले महीने 11 मार्च 2026 को केरल के पुअर गांव में एक मंदिर में हुई इस शादी को ‘लव जिहाद’ के नैरेटिव को झुठलाने के लिए पेश किया गया था। लेकिन NCST के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर गठित विशेष दल ने जब पड़ताल शुरू की, तो सच्चाई कुछ और ही निकली।
- अस्पताल के रिकॉर्ड: आयोग ने मध्यप्रदेश के महेश्वर स्थित सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाले। वहां दर्ज जन्म तिथि 30 दिसंबर 2009 के अनुसार, शादी के समय मोनालिसा की उम्र महज 16 साल 2 माह थी।
- फर्जी दस्तावेज: जांच में पाया गया कि शादी और पंजीकरण (Registration) के लिए आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र में हेरफेर कर उसे 18 साल से अधिक का दिखाया गया था।
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पुलिसिया कार्रवाई और DGP तलब
इस गंभीर मामले को देखते हुए खरगोन जिले के महेश्वर थाने में आरोपी फरमान खान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO), एट्रोसिटी एक्ट और बीएनएस (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।
आयोग ने इस मामले में लापरवाही और फर्जी दस्तावेजों के सत्यापन में हुई चूक को लेकर मध्यप्रदेश और केरल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को समन जारी कर दिल्ली तलब किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि फर्जीवाड़े के आधार पर कराया गया विवाह पंजीकरण तुरंत निरस्त किया जाए।
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साजिश और ‘फॉल्स नैरेटिव’ का आरोप
अधिवक्ता प्रथम दुबे द्वारा आयोग में की गई शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि यह केवल एक प्रेम विवाह नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरी रणनीतिक साजिश थी। आरोप है कि कुछ संगठनों ने इस विवाह को एक ‘फॉल्स नैरेटिव’ सेट करने के लिए ढाल बनाया था। पारधी जनजाति से ताल्लुक रखने वाली इस नाबालिग बेटी के साथ हुए इस धोखे ने केरल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है और फरार सहयोगियों की शिनाख्त की जा रही है। यह मामला दर्शाता है कि सोशल मीडिया की चकाचौंध के पीछे अक्सर कड़वी कानूनी हकीकतें छिपी होती हैं।







