बिलासपुर की छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 23 साल पुराने एक सनसनीखेज हत्या कांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और पूर्व विधायक अमित जोगी को दोषी करार दे दिया। गुरुवार को आए इस फैसले में अदालत ने अमित को तीन सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का सख्त निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट के हवाले से दोबारा सुनवाई के बाद यह निर्णय आया, जो राज्य की राजनीति में भूचाल ला सकता है।
एनसीपी नेता की बेरहम हत्या
मामला 2003 का है जब एनसीपी के स्थानीय नेता रामावतार जग्गी की निर्मम हत्या कर दी गई थी। अभियोजन के मुताबिक अमित जोगी इस साजिश में मुख्य सूत्रधार थे। सालों लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट ने पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि सुनाई। मृतक के बेटे ने इसे सत्य की जीत बताया, जबकि जोगी परिवार पर अब न्याय का पहला करारा प्रहार हुआ।
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सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने इस केस को हाईकोर्ट को भेजा था, जिसके बाद बिलासपुर कोर्ट ने तेजी से सुनवाई पूरी की। जोगी पक्ष की सारी दलीलें खारिज हो गईं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अपराध की गंभीरता और साक्ष्यों की मजबूती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। तीन हफ्ते का समय सरेंडर के लिए दिया, लेकिन सजा पर फैसला बाद में होगा।
राजनीतिक भूकंप की आहट
पूर्व सीएम अजीत जोगी के इस फैसले पर चुप्पी साधे रहने से सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई। अमित जोगी की राजनीतिक यात्रा पर यह करारा झटका है। विपक्ष इसे न्यायिक जीत बता रहा, जबकि समर्थक अपील की तैयारी में जुटे। छत्तीसगढ़ में पुराने घाव फिर हरे हो गए हैं।






