नई दिल्ली-देश में आगामी परिसीमन (Delimitation) की सुगबुगाहट के बीच राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए इस प्रक्रिया में अत्यधिक जल्दबाजी न करने की अपील की है। थरूर ने आगाह किया है कि यदि राज्यों की सहमति के बिना इस पर निर्णय लिया गया, तो यह भारत के संघीय ढांचे (Federal Structure) के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
क्या है विवाद की जड़?
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा संसद के विशेष सत्र में 131वें संविधान संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने की खबरों के बाद यह विवाद गहराया है। इस विधेयक के माध्यम से लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।
थरूर का मुख्य तर्क यह है कि परिसीमन का आधार केवल जनसंख्या को बनाना उन राज्यों के साथ ‘अन्याय’ होगा जिन्होंने दशकों तक केंद्र की जनसंख्या नियंत्रण नीतियों का पालन किया है।
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थरूर की मुख्य चिंताएं: 3 बड़े बिंदु
- दक्षिण बनाम उत्तर का विभाजन: शशि थरूर ने कहा, “जिन राज्यों (विशेषकर दक्षिण भारत) ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश कर जनसंख्या को नियंत्रित किया, उन्हें राजनीतिक रूप से कम प्रतिनिधित्व देकर दंडित नहीं किया जाना चाहिए।”
- संघीय सिद्धांतों का उल्लंघन: थरूर ने चेतावनी दी कि बिना व्यापक राष्ट्रीय संवाद और विपक्षी दलों के परामर्श के परिसीमन लागू करना लोकतंत्र के लिए “जोखिम भरा” है।
- उत्तरदायित्व की सजा: आंकड़ों के अनुसार, यदि 2021-26 के संभावित जनसंख्या आंकड़ों पर सीटें बांटी गईं, तो उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की सीटों में भारी उछाल आएगा, जबकि केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों का राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव घट जाएगा।
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आगामी कदम और राजनीतिक माहौल
कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि पार्टी महिला आरक्षण और परिसीमन को आपस में जोड़ने के खिलाफ है। थरूर ने मांग की है कि सरकार को पहले एक ‘अंतर-राज्य परिषद’ (Inter-State Council) की बैठक बुलानी चाहिए और एक ऐसा फॉर्मूला तैयार करना चाहिए जिससे किसी भी क्षेत्र को यह महसूस न हो कि उसे हाशिए पर धकेला जा रहा है।
“लोकतंत्र का अर्थ केवल ‘एक व्यक्ति-एक वोट’ नहीं है, बल्कि एक विविध राष्ट्र में सभी क्षेत्रों की समान भागीदारी भी है। यदि हम इसे नजरअंदाज करते हैं, तो हम भारत की एकता की नींव को कमजोर करेंगे।” शशि थरूर
फिलहाल, केंद्र सरकार 16 अप्रैल से शुरू होने वाले विशेष सत्र में इस बिल को पारित कराने की तैयारी में है, जिस पर विपक्ष ने कड़े विरोध के संकेत दिए हैं।







