देश की केंद्रीय बैंक RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) के हालिया आंकड़ों ने बाज़ार और नीति-विश्लेषकों के बीच हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोने के भंडार (Gold Reserves) के मूल्य में करीब ₹1.28 लाख करोड़ की गिरावट दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर इसे “खजाने से सोना गायब” जैसे दावों से जोड़ा जा रहा है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा तकनीकी और तथ्यात्मक है।
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क्या सच में सोना “साफ” हो गया?
सीधा जवाब नहीं। RBI के आंकड़े यह संकेत नहीं देते कि भौतिक सोना कम हुआ है। यह गिरावट मुख्यतः मूल्यांकन (valuation) से जुड़ी है। RBI अपने सोने के भंडार का मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों और रुपये–डॉलर विनिमय दर के आधार पर करता है। जब वैश्विक कीमतें या FX रेट बदलते हैं, तो भंडार का काग़ज़ी मूल्य घट-बढ़ सकता है भले ही सोने की मात्रा वही रहे।
₹1.28 लाख करोड़ की गिरावट कैसे बनी?
हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल ने मूल्यांकन पर असर डाला। RBI की बैलेंस शीट में मार्क-टू-मार्केट पद्धति से यह बदलाव दिखता है। यही कारण है कि एक बड़े आंकड़े के रूप में गिरावट नज़र आई, जबकि भंडार की सुरक्षा और मात्रा पर कोई प्रश्न नहीं उठता।
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RBI का सोना कहाँ और कैसे रखा जाता है?
RBI का सोना घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षित वॉल्ट्स में रखा जाता है। इसकी ऑडिट और रिपोर्टिंग नियमित रूप से होती है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप, भंडार की निगरानी और लेखांकन में कई स्तर की जाँच शामिल रहती है। इसलिए “सोना गायब” जैसे दावे तथ्यात्मक आधार पर टिकते नहीं।







