सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। दिनभर की ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स करीब 2100 अंक तक टूट गया, जिससे निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बन गया। वैश्विक बाजारों में दबाव और खासतौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय बाजार की धार को कमजोर कर दिया।
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बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों से निवेशक पहले ही सतर्क थे, लेकिन पश्चिम एशिया के हालात ने जोखिम को और बढ़ा दिया। इसका असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि एशिया और यूरोप के कई बड़े बाजारों पर भी देखा गया।
निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूबे
सोमवार की गिरावट का असर सिर्फ इंडेक्स तक सीमित नहीं रहा। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, इस गिरावट से निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब 9 से 10 लाख करोड़ रुपये तक की कमी आ गई। कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण बाजार का सेंटीमेंट भी नकारात्मक हो गया।
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पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई चिंता
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है।
अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे महंगाई, आयात बिल और आर्थिक संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि विदेशी निवेशकों ने भी सोमवार को बाजार में बिकवाली तेज कर दी।






