लखनऊ | ब्यूरो रिपोर्ट उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में अनुशासनहीनता और कार्यप्रणाली में ढिलाई को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए DGP (पुलिस महानिदेशक) राजीव कृष्णा ने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जनता के प्रति पुलिस की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से की गई इस कार्रवाई से पूरे विभाग में खलबली मच गई है।
5 थाना प्रभारी लाइन हाजिर कौन-कौन से जिले प्रभावित?
DGP ने प्रदेश के पांच अलग-अलग जिलों के थाना प्रभारियों पर गाज गिराते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। जिन जिलों के प्रभारियों पर यह कार्रवाई हुई है, उनमें शामिल हैं:
- वाराणसी
- गोरखपुर
- कन्नौज
- बाराबंकी
- जौनपुर
सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों और क्षेत्रीय फीडबैक के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण न पाने को इस कार्रवाई का मुख्य कारण माना जा रहा है।
डिप्टी SP स्तर के अधिकारियों पर भी शिकंजा
कार्रवाई केवल थाना प्रभारियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि DGP ने पुलिस उपाधीक्षक (डिप्टी SP) स्तर के दो अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
- बाराबंकी के CO ट्रैफिक: यातायात प्रबंधन में अनियमितताओं और अन्य शिकायतों के मद्देनजर बाराबंकी के सीओ ट्रैफिक पर जांच बैठाई गई है।
- जौनपुर के CO ट्रैफिक: जौनपुर में भी यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही के आरोपों की जांच के आदेश दिए गए हैं।
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DGP राजीव कृष्णा का स्पष्ट संदेश
DGP राजीव कृष्णा ने पदभार संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि उत्तर प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार और लापरवाही के लिए कोई स्थान नहीं है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में विभाग के भीतर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कई निलंबन और विभागीय जांचें शुरू की गई हैं। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य पुलिस की छवि को जनता के बीच सुधारना और कानून का इकबाल बुलंद करना है।







