शिलाई (सिरमौर), :पहाड़ों की वादियों में रीति-रिवाजों का अपना ही रंग होता है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में एक साल पहले हुई उस अनोखी शादी ने पूरे देश को चौंकाया था, जब दो सगे भाई प्रदीप नेगी और कपिल नेगी ने एक ही दुल्हन सुनीता चौहान के साथ सात फेरे लिए। अब इस जोड़ीदार विवाह की कहानी में एक नया अध्याय जुड़ गया है। सुनीता गर्भवती हैं और परिवार में पहले बच्चे का आगमन होने वाला है। बड़े भाई प्रदीप के साथ मिलकर सुनीता ने खुद सोशल मीडिया पर इस खुशखबरी को साझा किया, जिससे हाटी समुदाय के इस पुराने रिवाज ने फिर से सुर्खियां बटोर ली हैं।
जोड़ीदार प्रथा: जमीन बचाने की सदियों पुरानी परंपरा
सिरमौर और आसपास के पहाड़ी इलाकों में हाटी समुदाय में ‘जोड़ीदार’ या ‘पॉलीएंड्री’ प्रथा का लंबा इतिहास रहा है। यह रिवाज मुख्य रूप से संपत्ति के बंटवारे को रोकने और परिवार की एकजुटता बनाए रखने के लिए विकसित हुआ। संकट के समय, जब पुरुष घर से दूर रहते थे या कम संख्या में थे, यह प्रथा परिवार को मजबूत बनाए रखती थी। लेकिन आधुनिक शिक्षा और शहरीकरण के दौर में ऐसे मामले दुर्लभ हो चुके हैं। प्रदीप और कपिल जो एक तरफ जलशक्ति विभाग में नौकरी करते हैं, तो दूसरी तरफ विदेश में शेफ की जिम्मेदारी संभालते हैं ने पढ़े-लिखे होने के बावजूद इस परंपरा को अपनाया। जुलाई 2025 में थिंडो खानदान के इन भाइयों ने कुन्हट गांव की सुनीता से पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ विवाह किया। शादी के तीन दिनों तक चले फेरों ने नाहन से दिल्ली तक चर्चा पैदा कर दी थी।
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खुशखबरी का ऐलान: सोशल मीडिया पर वायरल भावनाएं
परिवार ने खुद फेसबुक पेज बनाकर अपनी जिंदगी की झलकियां साझा की हैं। सुनीता ने एक पोस्ट में लिखा, “हम तीन से चार होने जा रहे हैं। भगवान की कृपा से सब ठीक रहेगा।” प्रदीप ने वीडियो में कहा, “हमारा परिवार मजबूत है, बच्चे के जन्म से और मजबूत होगा।” कपिल ने भी विदेश से मैसेज कर बधाई दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह खबर गांव में उत्साह लेकर आई है। एक बुजुर्ग महिला ने बताया, “हमारे यहां यह सामान्य है। बच्चा पूरे परिवार का होगा, कोई भेदभाव नहीं।” हालांकि, शहरों से कुछ लोग इसे ‘असामान्य’ मानते हैं, लेकिन परिवार का कहना है कि वे खुश हैं और समाज का साथ मिल रहा है।
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सामाजिक नजरिया: परंपरा बनाम आधुनिकता का टकराव
यह घटना पहाड़ी संस्कृति के संरक्षण और बदलते भारत के बीच खींचतान को उजागर करती है। हाटी समुदाय में अभी भी 5-10 प्रतिशत परिवारों में यह प्रथा दिखती है, लेकिन कानूनी रूप से हिंदू विवाह अधिनियम के तहत मान्यता का सवाल उठता है। सामाजिक कार्यकर्ता मीरा ठाकुर कहती हैं, “यह व्यक्तिगत पसंद है, लेकिन शिक्षा से युवा इससे दूर हो रहे हैं। फिर भी, अगर तीनों खुश हैं तो क्या दिक्कत?” विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक मजबूती और पारस्परिक समझ ही इसकी कुंजी है। सुनीता की प्रेग्नेंसी ने साबित कर दिया कि यह रिश्ता कागजों से कहीं आगे बढ़ चुका है।
आगे क्या? परिवार का भविष्य
अभी सुनीता की सेहत अच्छी है और डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव की सलाह दी है। प्रदीप और कपिल पूरे समय साथ रहेंगे। गांव वाले पहले ही बधाई सभाओं की तैयारी में जुटे हैं। यह कहानी बताती है कि परंपराएं जड़ें जमाए रहती हैं, भले ही दुनिया बदल जाए। सिरमौर की ये वादियां नई जिंदगी का स्वागत करने को बेताब हैं।







