अकोला-महाराष्ट्र के अकोला जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो पुलिस व्यवस्था की पूरी छवि को धूल चटा रही है। सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन में तैनात 54 वर्षीय सहायक उपनिरीक्षक (ASI) राजेश जाधव पर एक महिला कैदी से उसकी बेटी को ‘शारीरिक सुख’ के लिए भेजने की घिनौनी मांग करने का आरोप लगा है।
लॉकअप में घिनौना प्रस्ताव
मंगलवार शाम को सिविल लाइन्स थाने के लॉकअप में बंद महिला को 80 लाख रुपये के वित्तीय धोखाधड़ी मामले में रखा गया था। ड्यूटी पर तैनात जाधव ने कथित तौर पर कहा, “तुम बहुत सुंदर हो, तुम्हारी बेटी भी वैसी ही होगी। उसे मेरे पास भेज दो, मैं तुम्हें 10 हजार रुपये दूंगा।” महिला ने तुरंत महिला गार्ड को इसकी शिकायत सुनाई, जिससे मामला वरिष्ठों तक पहुंच गया।
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वरिष्ठों का त्वरित डांट-फटकार, वीडियो वायरल
शिकायत मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी थाने पहुंचे और जाधव की जमकर क्लास लगाई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि अधिकारी चिल्ला रहे हैं, लेकिन जाधव वर्दी का फायदा उठाकर बचने की कोशिश करता नजर आया। इसके बाद वह थाने से फरार हो गया, और अब गुन्हे शाखा उसकी तलाश में जुटी है।
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तत्काल निलंबन, FIR दर्ज
जिला पुलिस अधीक्षक अर्चित चांडक ने घटना की गंभीरता देखते हुए जाधव को तुरंत निलंबित कर दिया। उसके खिलाफ महिला की गरिमा भंग करने (IPC 354) समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज हो चुका है। यह कार्रवाई मंगलवार रात ही हो गई, जो विभाग की संवेदनशीलता दिखाती है।
पुराना इतिहास या संयोग?
सूत्र बताते हैं कि 10 साल पहले जाधव की पत्नी ने भी उसके खिलाफ शिकायत की थी, लेकिन अब यह मामला फिर से सुर्खियों में है। राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. आशा मिरगे ने भी इस पर खुलकर बयान दिया है। अकोला में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं – क्या थाने अब असुरक्षित हो गए?
नागरिकों में आक्रोश की लहर
घटना के बाद सोशल मीडिया पर #AkolaPoliceScandal ट्रेंड कर रहा है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि रक्षक ही भक्षक बन जाए तो न्याय कहां? विभाग ने जांच तेज कर दी है, लेकिन जाधव की गिरफ्तारी तक सवाल बने रहेंगे। यह केस पुलिस सुधारों की जरूरत को रेखांकित करता है।






