Sikkim army jawan Vikas Kumar martyred avalanche son first birthday tragedy – हिमालय की गोद में डटा सिक्किम सीमा पर एक जवान ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। 28 वर्षीय विकस कुमार बर्फीले हिमस्खलन की चपेट में शहीद हो गए, ठीक उसी दिन जब उनका छोटा बेटा पहला जन्मदिन मना रहा था।
सीमा पर कर्तव्य, घर में इंतजार
उत्तराखंड के रहने वाले लांस नायक विकस कुमार भारतीय सेना के साहसी सिपाही थे। सिक्किम के ऊंचे पहाड़ी इलाके में तैनाती के दौरान अचानक आए भयानक हिमस्खलन ने उनकी जान ले ली। परिवार को खबर मिली तो घर में सन्नाटा छा गया – बेटे आरुष का पहला जन्मदिन आधा-अधूरा रह गया।
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तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर
शहीद के शव को तिरंगे में लपेटकर पैतृक गांव लाया गया। पूरा इलाका सलामी के लिए उमड़ पड़ा। छोटे बेटे ने अभी पिता को पहचाना भी नहीं था, फिर भी मासूम आंखों से तिरंगे को निहारता रहा। पत्नी की चीत्कार ने हर किसी का दिल दहला दिया।
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पहले जन्मदिन पर पिता का शोक
विकस को अपने बेटे के जन्मदिन पर घर लौटना था। लेकिन नियति ने कुछ और ही लिखा। सेना के साथी बताते हैं कि विकस हमेशा परिवार के लिए लालायित रहते थे। अब पूरा गांव उनके छोटे परिवार का सहारा बनेगा एक विधवा और अनाथ बेटे का।
हिमवीरों की अमर गाथा
सिक्किम जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात जवान बर्फीले तूफानों से जूझते हैं। विकस जैसे वीरों की शहादत देश की सुरक्षा का प्रतीक है। सरकार ने शहीद को श्रद्धांजलि दी, लेकिन सवाल उठता है – क्या इनकी फैमिली को वो सम्मान मिलेगा जो इन्होंने कमाया?
परिवार की पुकार, राष्ट्र का ऋण
शहीद की पत्नी ने कहा, “विकस का सपना था बेटे को गोद में उठाकर जन्मदिन मनाना।” यह दर्द सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि हर उस घर का है जहां सीमा पर तैनात जवान रहते हैं। विकस अमर रहेंगे, लेकिन उनके अधूरे सपने को पूरा करना हम सबकी जिम्मेदारी है।







