Singrauli woman trafficking case-सिंगरौली जिला एवं सत्र न्यायालय के सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश उमेश कुमार सोनी ने महिला खरीद-फरोख्त के एक संवेदनशील मामले में सह-आरोपी नीरज कुमार विश्वकर्मा की दूसरी नियमित जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया। 50 हजार रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की जमानती रसीद पर आरोपी को रिहा करने का आदेश जारी हुआ, जिसमें उसकी आसन्न शादी को महत्वपूर्ण आधार माना गया। यह फैसला न केवल आरोपी के पक्ष में गया, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में मानवीय पहलू को रेखांकित करता है।
अपहरण से भागने की सच्ची कहानी
मामला 10 मार्च 2026 का है जब संगीता शाह ने थाने में शिकायत दर्ज की कि आरोपी दिनेश शाह ने उसे बाइक पर बिठाकर एक सफेद बोलेरो में सवार कर लिया, जहां छह अन्य लोग मौजूद थे। रास्ते में एक व्यक्ति ने खुलासा किया कि दिनेश ने उसे चार लाख रुपये में बेच दिया है। सौभाग्य से पीड़िता मौके से भाग निकली और 21 मार्च को पुलिस के पास पहुंची। मुख्य आरोपी दिनेश के मेमोरेंडम बयान पर नीरज को 22 मार्च को गिरफ्तार किया गया।
बचाव का मजबूत तर्क
आरोपी के वकील मनोज जायसवाल ने बारीकी से दलीलें रखीं कि नीरज का नाम मूल शिकायत में कहीं नहीं था, केवल सह-आरोपी के बयान पर ही कार्रवाई हुई। नीरज एमपी ऑनलाइन दुकान चलाता है, उसका कोई पुराना अपराधिक इतिहास नहीं। सबसे बड़ा मुद्दा 20 अप्रैल को तय विवाह था, जिससे परिवार और होने वाले जीवनसाथी पक्ष को भारी नुकसान हो रहा। घटना के 11 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज होने पर भी सवाल उठाया।
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न्यायालय की संतुलित नजर
अदालत ने पाया कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं और विवेचना के लिए लंबी हिरासत जरूरी नहीं। गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए जमानत शर्तें तय की गईं: 50 हजार का व्यक्तिगत बंधपत्र व जमानत, साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करना, और हर सुनवाई पर हाजिर रहना। न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि लंबी विवेचना को देखते हुए न्यायिक हिरासत अब उचित नहीं। यह फैसला कानूनी संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है।






