सोशल मीडिया पर वायरल पुरानी कहानी एक बार फिर सुर्खियां बटोर रही है। 1991 में महज नौ साल के किम जोंग उन ने अपने बड़े भाई किम जोंग चुल के साथ ब्राजील के नकली पासपोर्ट से टोक्यो डिज्नीलैंड का दौरा किया था। जापानी मीडिया ने 2011 में इस रहस्य को सबसे पहले उजागर किया था।
फर्जी पहचान का जादुई खेल
मई 1991 में किम ने खुद को ‘जोसेफ प्वाग’ नाम दिया और भाई संग दस कोरियाई अधिकारियों के काफिले के साथ जापान पहुंचे। एक हफ्ते की इस यात्रा में उन्होंने डिज्नीलैंड कई बार घूमा। ब्राजील पासपोर्ट इसलिए चुना गया क्योंकि इसके विविध चेहरे एशियाई चेहरे में आसानी से घुलमिल जाते।
भाई की एयरपोर्ट पर पकड़
उनके सौतेले भाई किम जोंग नाम 2001 में इसी तरह के डोमिनिकन पासपोर्ट से नारिता एयरपोर्ट पर पकड़े गए। बीबीसी की रिपोर्ट बताती है कि किम पिता-पुत्र ने 1996 में प्राग के ब्राजील दूतावास से ये दस्तावेज हासिल किए थे। रॉयटर्स ने फोटोकॉपी जांचकर पुष्टि की|
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लॉन्ग टेल कीवर्ड: किम जोंग उन 1991 ब्राजील फर्जी पासपोर्ट टोक्यो डिज्नीलैंड भाई यात्रा
ब्राजील अधिकारियों ने इन्हें ‘बिल्कुल असली जैसा’ बताया। यह किम परिवार की गुप्त पश्चिमी यात्राओं की रणनीति का हिस्सा था। आज न्यूक्लियर हथियारों वाले किम का बचपन का यह ‘मिकी माउस’ दौर विपरीत लगता है।
35 साल बाद नई बहस
अप्रैल 2026 में वायरल पोस्ट ने इसे फिर जिंदा किया। विशेषज्ञ कहते हैं, किम राजवंश की गोपनीयता का यह नमूना अब भी रहस्यमय है। जापानी रिपोर्ट्स विश्वसनीय मानी जाती हैं, पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई|







