मध्य प्रदेश के आसमान पर बादलों ने फिर से डेरा डाल दिया है। उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं और अरब सागर से उठने वाली नमी के मिलन के कारण प्रदेश में एक नया ‘वेदर सिस्टम’ सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस बदलाव को देखते हुए आज भोपाल, ग्वालियर और चंबल संभाग सहित प्रदेश के 34 जिलों में ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह स्थिति अगले तीन दिनों तक बनी रहने की संभावना है, जिससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की जाएगी।
तेज हवाओं और ओलावृष्टि की चेतावनी
मौसम विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, राज्य के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में मौसम का असर सबसे ज्यादा दिखाई देगा। इन इलाकों में 40 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने (Gale Winds) का अनुमान है। हवाओं के साथ-साथ गरज-चमक के साथ बारिश और कुछ संवेदनशील इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी प्रबल संभावना जताई गई है। विशेष रूप से ग्वालियर-चंबल अंचल में ओले गिरने से फसलों को नुकसान पहुँचने की आशंका भी बनी हुई है, जिससे किसान चिंतित हैं।
इन जिलों में दिखेगा मौसम का सबसे ज्यादा असर
अलर्ट के दायरे में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सागर जैसे संभाग भी शामिल हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से सागर, रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के जिलों में भी धूल भरी आंधी चलने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें, क्योंकि तेज हवाओं के कारण इनके गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
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तापमान में गिरावट और किसानों के लिए सलाह
इस मौसमी बदलाव के चलते प्रदेश के दिन और रात के तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मशविरा दिया है कि जो फसलें कट चुकी हैं, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखें और अनाज की बोरियों को तिरपाल से ढककर रखें ताकि बारिश और ओलों से बचाव हो सके। बिजली कड़कने के दौरान खेतों में काम कर रहे मजदूरों को भी सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेने की चेतावनी दी गई है।
प्रशासन की तैयारी और भविष्य की राह
जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखें। बिजली विभाग को भी बिजली की लाइनों और ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि आंधी के दौरान लंबे समय तक बिजली गुल न रहे। मौसम विभाग का कहना है कि यह सिस्टम 10 अप्रैल के बाद कमजोर पड़ना शुरू होगा, जिसके बाद राज्य के अधिकांश हिस्सों में एक बार फिर गर्मी का असर बढ़ेगा। तब तक नागरिकों को सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है।







