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ढोल के शोर में दबा सच? ‘जज’ की बेटी के तलाक पर फौजी पति का दर्दनाक खुलासा।

By: डिजिटल डेस्क

On: Wednesday, April 8, 2026 6:46 PM

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मेरठ/शाहजहांपुर-अभी दो दिन पहले सोशल मीडिया और समाचारों में मेरठ की एक खबर छाई रही, जहां एक रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता के तलाक मिलने पर ढोल-नगाड़ों और फूलों के साथ उसका घर में स्वागत किया। इस घटना को ‘महिला सशक्तिकरण’ और ‘रूढ़ियों को तोड़ने’ के उदाहरण के रूप में खूब सराहा गया। लेकिन अब इस कहानी का दूसरा पहलू भी सामने आया है, जिसने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।

प्रणिता के पति और सेना में मेजर गौरव अग्निहोत्री के परिवार ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। गौरव के पिता और रिटायर्ड सूबेदार श्याम किशोर अग्निहोत्री का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने उनके परिवार की छवि को बहुत ठेस पहुंचाई है।

“दहेज नहीं लिया, फिर भी कोर्ट घसीटा गया”

श्याम किशोर अग्निहोत्री ने बताया कि 2018 में हुई इस शादी में उन्होंने कोई दहेज नहीं लिया था। उनका आरोप है कि प्रणिता के परिवार वाले शुरू से ही हर मामले में अपनी मर्जी थोपना चाहते थे। उन्होंने कहा, “शादी के एक साल के भीतर ही बेटे पर मुकदमा करवा दिया गया। हमने उत्तराखंड के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर जांच की मांग की, जिसमें पता चला कि जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपने पद का प्रभाव इस्तेमाल किया था।”

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बच्चे के मुंडन पर शुरू हुआ अंतिम विवाद

विवाद की जड़ों को बताते हुए श्याम किशोर ने कहा कि पिछले साल जब प्रणिता ने बेटे को जन्म दिया, तो परिवार में खुशी का माहौल था। लेकिन कुछ ही समय बाद वह बच्चे को लेकर मायके चली गईं और वहां बिना ससुराल पक्ष को सूचना दिए मुंडन संस्कार करवा दिया। जब लड़के पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई, तो मामला तलाक तक पहुंच गया। गौरव के पिता के अनुसार, गौरव तलाक नहीं चाहता था, लेकिन प्रताड़ना और दबाव के कारण उसने अंततः सहमति दे दी।

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संपत्ति और गहनों पर दावों का सच?

जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने प्रेस को दिए बयानों में कहा था कि उन्होंने तलाक के बदले कोई पैसा या गुजारा भत्ता नहीं लिया है। इसके उलट, श्याम किशोर अग्निहोत्री का दावा है कि:

  • जमीन: उन्होंने 3 बीघा जमीन अपनी बहू (प्रणिता) के नाम कर दी है।
  • गहने: लगभग 55-60 लाख रुपये की ज्वेलरी प्रणिता के पास ही है।
  • गाड़ी: मेजर गौरव की कार भी लड़की पक्ष ने अपने पास रख ली है।

“पोते से दूर होने का गम”

भावुक होते हुए श्याम किशोर ने कहा कि सबसे बड़ा दुख यह है कि अब गौरव अपने बेटे से कभी नहीं मिल पाएगा और दादा-दादी अपने पोते को नहीं देख सकेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट में इस बात को लेकर भी उनके पक्ष को दबाया गया।

निष्कर्ष: मेरठ का यह मामला अब केवल एक ‘साहसी पिता’ की कहानी नहीं रह गया है, बल्कि यह दो परिवारों के बीच छिपे गहरे विवाद, कानूनी दांव-पेंच और सोशल मीडिया के दौर में एकतरफा ‘ट्रायल’ का उदाहरण बन गया है। सच क्या है, यह तो जांच का विषय है, लेकिन ढोल की थाप के पीछे एक पिता और बेटे की सिसकियाँ भी दबी हुई हैं।

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