सिंगरौली/रीवा:मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में शिक्षा विभाग के भीतर चल रहे एक बड़े भ्रष्टाचार के खेल का रीवा लोकायुक्त पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सूर्यभान सिंह और सहायक संचालक राजधर साकेत सहित विभाग के कई अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद स्कूलों के लिए की गई हाई-टेक सामग्री की खरीदी से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि जिले के सरकारी स्कूलों में ‘वर्चुअल रियलिटी’ (VR) लैब स्थापित करने और विभिन्न बिजली उपकरणों की आपूर्ति के नाम पर सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाई गई। लोकायुक्त की टीम को शिकायत मिली थी कि इन सामग्रियों की खरीदी बाजार दर से कई गुना अधिक कीमतों पर दिखाई गई है, जबकि धरातल पर कई स्कूलों में यह सामान पहुँचा ही नहीं या बेहद घटिया स्तर का है।
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करोड़ों का हेरफेर और फर्जी बिलिंग
शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, यह घोटाला करीब 3 से 5 करोड़ रुपये के बीच का बताया जा रहा है। जांच में पाया गया कि अधिकारियों ने अपनी पसंदीदा फर्मों को फायदा पहुँचाने के लिए निविदा प्रक्रिया (Tender Process) में भी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं।
- VR लैब घोटाला: बिना किसी तकनीकी सत्यापन के लाखों के बिल पास किए गए।
- बिजली उपकरण: स्कूलों में पंखे, लाइट और अन्य उपकरणों की संख्या कागजों पर ज्यादा दिखाई गई।
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अधिकारियों पर कानूनी शिकंजा
लोकायुक्त रीवा के पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है। DEO सूर्यभान सिंह और राजधर साकेत के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। लोकायुक्त की टीम अब उन वेंडर्स और सप्लायर्स की भी तलाश कर रही है, जो इस पूरे सिंडिकेट का हिस्सा थे।
सिंगरौली के जागरूक नागरिकों का कहना है कि जहां एक ओर सरकार सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी बच्चों के भविष्य के लिए आए बजट को अपनी जेब में भर रहे हैं।







