नई दिल्ली-आम आदमी पार्टी ने अपने चहेते नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी के राज्यसभा उपनेता पद से हटा दिया है। 1 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सचिवालय को लिखे औपचारिक पत्र में पार्टी ने साफ कहा कि अब चड्ढा को बोलने का समय भी नहीं मिलेगा। पंजाब से राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को नया उपनेता बनाया गया। यह फैसला पार्टी के आंतरिक समीकरणों में उथल-पुथल की आहट दे रहा।
चुप्पी और अनुपस्थिति का राज
दिसंबर 2023 में मिली इस जिम्मेदारी से चड्ढा को हटाने का कारण उनकी लंबी चुप्पी और अरविंद केजरीवाल के कार्यक्रमों से दूरी बताई जा रही। चार्टर्ड अकाउंटेंट से राजनीति में आए चड्ढा दिल्ली चुनावों के रणनीतिकार रहे। लेकिन हालिया महीनों में उनकी अनदेखी ने सवाल खड़े किए। पार्टी नेतृत्व ने पत्र में स्पष्ट किया कि अब उनका कोटा समय भी बंद। यह कदम AAP के केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति का हिस्सा लगता।
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चड्ढा का इमोशनल पोस्ट
पद छिनते ही चड्ढा ने सोशल मीडिया पर संसदीय भाषणों का वीडियो शेयर किया, जिसमें बुरी नजर वाला इमोजी जोड़ा। बिना शब्दों के यह पोस्ट पार्टी आंतरिक कलह की ओर इशारा करता। चड्ढा 2012 से AAP के साथ हैं, केजरीवाल के करीबी रहे। दिल्ली लोकपाल बिल और घोषणा पत्र ड्राफ्टिंग में उनकी भूमिका अहम थी। अब सवाल उठ रहा क्या यह स्थायी बेदखली?
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सियासी गलियारों में हलचल
कांग्रेस ने तंज कसा कि AAP में आंतरिक दरार साफ दिख रही। विपक्षी दलों ने इसे कमजोरी का संकेत बताया। AAP ने सफाई दी कि यह प्रशासनिक बदलाव मात्र। लेकिन चड्ढा जैसे चेहरे को दरकिनार करना पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े करता। पंजाब और दिल्ली चुनावों से पहले यह घटनाक्रम रणनीतिक चाल या संकट का संकेत? राजनीतिक पंडितों की नजरें अब चड्ढा पर।
भविष्य का अनुमान
चड्ढा की चुप्पी टूटेगी या पार्टी से दूरी बढ़ेगी? अशोक मित्तल का नया रोल AAP की संसदीय रणनीति बदलेगा। यह घटना छोटी लगे, लेकिन आप जैसे दल के लिए बड़ा संदेश। चड्ढा का अगला कदम तय करेगा कि यह विवाद खत्म होगा या बढ़ेगा। सियासत का खेल अभी जारी।







