UPSC 2025 first attempt success-मध्य प्रदेश के छोटे से शहर हरदा के श्रेयंश बार्डिया ने साबित कर दिया कि असली सफलता आंकड़ों में नहीं, सेवा भाव में बसती है। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में पहली ही कोशिश में एयआर 194 हासिल कर उन्होंने न केवल अपना, बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया। IIT मुंबई से बीटेक करने के बाद छह साल आईटी की दुनिया में बिताने वाले श्रेयंश ने आखिरकार जॉब छोड़कर देश सेवा का रास्ता चुना।
2.3 करोड़ का प्रस्ताव नामंजूर
कैंपस प्लेसमेंट में बहुराष्ट्रीय कंपनी का 2.3 करोड़ सालाना पैकेज पाकर भी श्रेयंश का मन नहीं माना। गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर चमकदार करियर की बजाय उन्होंने समाज सुधार का लक्ष्य रखा। इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “तकनीकी ज्ञान से नीतियां बनानी हैं, ताकि आम आदमी का जीवन बदले।” यह फैसला आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
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बिना कोचिंग की मिसाल
श्रेयंश की खासियत रही सिर्फ नौ महीने की सेल्फ स्टडी। कोई महंगा कोचिंग सेंटर नहीं, बस अनुशासित रूटीन- अखबारों का गहरा विश्लेषण, सीमित किताबें और रोज उत्तर लेखन। अगस्त 2024 में नौकरी छोड़ मुंबई में पढ़ाई की, मई 2025 में प्रीलिम्स, अगस्त में मेन्स और जनवरी 2026 में इंटरव्यू पार किया।
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हरदा में उत्सव का दौर
परिणाम की खबर फैलते ही हरदा में दीवाली सा जश्न छा गया। घर पर बधाई देने वालों की कतारें लगीं, माता-पिता की आंखें नम हो गईं। परिवार ने हमेशा उन्हें दिल की सुनने को कहा, जो आज फलीभूत हो रहा। नर्मदापुरम जिला गौरवान्वित है इस बेटे पर।
भविष्य में जमीनी बदलाव
IAS बनने के बाद श्रेयंश शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देंगे। ग्रामीण स्तर पर जाकर वंचितों तक पहुंचना उनका सपना है। उनकी कहानी बताती है कि साफ नीयत और जुनून से कोई मुकाम नामुमकिन नहीं।







