नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक सीमा पर बना हुआ है। रविवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि इसी के साथ उत्तर भारत के कई राज्यों में शीतलहर और घने कोहरे ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
दिल्ली की वायु गुणवत्ता फिर “बेहद खराब”
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अधिकतर हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 350 से 400 के बीच दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में ठंड बढ़ने और हवा की गति धीमी पड़ने से प्रदूषण के कण जमीन के पास जमते जा रहे हैं।
पर्यावरण विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि सुबह-शाम के समय अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और मास्क का उपयोग करना न भूलें।
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ऑरेंज अलर्ट से बढ़ी सख्ती, निर्माण कार्यों पर निगरानी
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत प्रशासन ने ऑरेंज अलर्ट लागू करते हुए कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं।
- धूल फैलाने वाले निर्माण कार्यों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
- भारी डीज़ल वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगाई जा रही है।
- सरकारी व निजी एजेंसियों को पानी का छिड़काव और सड़क की साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली सरकार ने यह भी कहा है कि स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जरूरत पड़ने पर स्कूलों में छुट्टियाँ घोषित की जा सकती हैं।
उत्तर भारत में ठंड और कोहरे का कहर
वहीं, उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में शीतलहर और घने कोहरे ने यातायात व्यवस्था को अव्यवस्थित कर दिया है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सुबह-सुबह दृश्यता बेहद कम रही, कई स्थानों पर 50 मीटर से भी नीचे।
रेलवे और हवाई सेवा पर इसका असर पड़ा है कई ट्रेनें घंटों की देरी से चल रही हैं जबकि दिल्ली सहित कई हवाई उड़ानों का समय बदला गया।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले तीन दिनों तक क्षेत्र में ठंड और कोहरे की स्थिति बने रहने के आसार जताए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर-पश्चिमी हवाओं की गति धीमी होने और तापमान में भारी गिरावट के चलते यह स्थिति आगे और बिगड़ सकती है।
जनजीवन पर दोहरी मार
दिल्ली-NCR में एक ओर जहरीली हवा का खतरा, तो दूसरी ओर सर्दी और कोहरा लोगों की दिनचर्या पर भारी पड़ रहा है। विशेषज्ञ नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि वे प्रदूषण बढ़ाने वाले कारकों जैसे खुले में कूड़ा जलाने, पटाखे या अत्यधिक वाहन उपयोग से बचें।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह समय केवल सरकारी कदमों का नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का है।






