मुजफ्फरनगर-उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की एक स्थानीय अदालत ने सात साल पुराने चर्चित अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड में मंगलवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। अदालत ने पैसे के लालच में अपने ही दोस्त की बेरहमी से हत्या करने वाले तीनों आरोपियों को फांसी (सजा-ए-मौत) की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद कचहरी परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर संतोष जताया।
क्या था पूरा मामला?
यह खौफनाक वारदात साल 2019 की है। मुजफ्फरनगर के प्रमुख अधिवक्ता समीर सैफी अचानक लापता हो गए थे। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो कई दिनों की मशक्कत के बाद उनका शव बरामद हुआ। जांच में जो तथ्य सामने आए, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।
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- धोखे की दास्तां: समीर सैफी की हत्या किसी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उनके बेहद करीबी दोस्तों ने मिलकर की थी।
- हत्या का कारण: पुलिस जांच और कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के अनुसार, हत्या के पीछे मुख्य वजह पैसे का लेनदेन था। समीर ने अपने दोस्तों को मोटी रकम उधार दी थी, जिसे लौटाने के बजाय आरोपियों ने उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।
- बेरहमी की हदें: आरोपियों ने समीर को बहाने से बुलाया, उनकी बेरहमी से हत्या की और पहचान छुपाने के लिए लाश को ठिकाने लगा दिया।
अदालत का फैसला और सजा
पुलिस ने इस मामले में सिंघोल अल्वी, शालू उर्फ अरबाज और सोनू उर्फ रिजवान को नामजद करते हुए जेल भेजा था। करीब सात साल तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने तीनों को दोषी करार दिया।
- ऐतिहासिक सजा: माननीय न्यायाधीश ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभतम से दुर्लभ) माना। अदालत ने टिप्पणी की कि दोस्ती जैसे पवित्र रिश्ते को कलंकित कर की गई यह हत्या समाज के लिए एक बड़ा खतरा है।
- जुर्माना: फांसी की सजा के साथ-साथ दोषियों पर भारी आर्थिक दंड भी लगाया गया है, जिसे न चुकाने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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वकीलों और समाज में खुशी की लहर
इस मामले में सजा के ऐलान के बाद मुजफ्फरनगर बार एसोसिएशन ने खुशी जाहिर की है। वकीलों का कहना है कि एक साथी अधिवक्ता के साथ हुई इस दरिंदगी के बाद आज न्याय की जीत हुई है।
ताजा स्थिति: दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला जेल भेज दिया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अपराधियों में कानून का खौफ पैदा होगा। पुलिस प्रशासन ने भी इस मामले में पैरवी करने वाले अधिकारियों की सराहना की है, जिनकी ठोस गवाही के दम पर दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया जा सका।







