Singrauli district court bail rejection-सिंगरौली जिला न्यायालय के षष्ठम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार कुशवाहा ने दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक दिल दहला देने वाले हत्याकांड में सास सुभगिया देवी और जेठानी भानमती उर्फ पानमती वैश्य की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। 31 मार्च 2026 को आए इस फैसले ने न केवल पीड़िता अर्चना वैष्णव के परिवार को न्याय की आस दी, बल्कि समाज में दहेज लोभी मानसिकता के खिलाफ एक सशक्त चेतावनी भी बस्ता दी।
विवाह से त्रासदी तक का सफर
अर्चना का विवाह 10 मई 2023 को राजेश कुमार वैष्णव से हुआ, लेकिन सुख का यह बंधन महज दो माह बाद दहेज के भयानक दानव में बदल गया। पति राजेश, ससुर हरि प्रसाद, सास सुभगिया और जेठानी भानमती ने 2.50 लाख रुपये नकद की मांग ठोंक दी, जिसके बाद अर्चना को दिन-रात शारीरिक-मानसिक यातनाएं सहनी पड़ीं। आखिरकार 21 फरवरी 2026 को मोरवा थाना क्षेत्र के ससुराल में उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। थाना मोरवा ने अपराध क्रमांक 157/2026 में बीएनएस की धारा 80(2), 85, 3(5) और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया।
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बचाव पक्ष की कमजोर दलीलें
आरोपियों के वकील ने अदालत में निर्दोषता का रोना रोया, दावा किया कि अर्चना मानसिक रूप से अस्वस्थ थी और आत्महत्या का कारण वही रहा। उन्होंने जेल में बंद छोटे बच्चे आदित्य वैष्णव (जन्म 2024) के स्वास्थ्य का हवाला देकर भावुक अपील की। लेकिन ये तर्क केस डायरी के पुख्ता साक्ष्यों के आगे पानी भर गए, क्योंकि मायके पक्ष के गवाहों ने प्रताড়ना और मारपीट की साफ तस्वीर बयानों में पेश की।
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साक्ष्यों की मजबूत दीवार
न्यायालय ने केस डायरी का गहन अवलोकन कर पाया कि अर्चना की मौत विवाह के सात वर्षों के भीतर संदिग्ध हालात में हुई, जो कानूनी रूप से गंभीर है। गवाह बयान, घटनास्थल के प्रमाण और आरोपियों की संलिप्तता के स्पष्ट संकेतों ने जमानत के द्वार बंद कर दिए। न्यायाधीश ने बीएनएस धारा 483 के तहत राहत देने से साफ इनकार किया, क्योंकि अपराध की गंभीरता जमानत को उचित नहीं ठहराती।
फरार मुख्य आरोपी का साया
इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है मुख्य आरोपी पति राजेश कुमार वैष्णव, जो अब तक फरार है। पुलिस पर दबाव बढ़ रहा है कि उसे जल्द जाल में फंसाया जाए, वरना न्याय का यह चक्र अधूरा रहेगा। सिंगरौली जैसे क्षेत्र में जहां दहेज की आग धीमी-धीमी सुलगती रहती है, यह फैसला नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता इसे जागरूकता का संकेत बता रहे हैं।







