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नौकरीपेशा लोगों की चांदी, अब मिलेगा ₹50,000 का अतिरिक्त टैक्स रिफंड

By: डिजिटल डेस्क

On: Wednesday, April 8, 2026 9:20 AM

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नई दिल्ली | भारत के करोड़ों मध्यमवर्गीय करदाताओं और नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ ‘नया आयकर अधिनियम 2025’ खुशियों की सौगात लेकर आया है। 64 साल पुराने कानून की जगह लेने वाले इस नए अधिनियम ने न केवल टैक्स फाइलिंग की जटिलताओं को कम किया है, बल्कि मध्यम आय वर्ग (Middle Income Group) की जेब में सीधे तौर पर अधिक पैसा पहुँचाने का रास्ता भी साफ कर दिया है। वित्त मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इस बदलाव से विशेष रूप से उन लोगों को लाभ होगा जिनकी वार्षिक आय ₹7 लाख से ₹10 लाख के बीच है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन में ऐतिहासिक वृद्धि

नए आयकर अधिनियम के तहत सबसे बड़ा बदलाव स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) की सीमा में किया गया है। पुराने कानून के तहत मिलने वाली छूट को अब संशोधित कर दिया गया है, जिससे कर योग्य आय (Taxable Income) की गणना में करदाताओं को बड़ी राहत मिल रही है।

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नए नियमों के अनुसार, ₹7 लाख से ₹10 लाख के स्लैब में आने वाले कर्मचारियों को अब पुराने सिस्टम की तुलना में 50,000 तक का अतिरिक्त रिफंड मिल सकता है। सरकार का मुख्य उद्देश्य उपभोग (Consumption) को बढ़ावा देना और करदाताओं के हाथ में अधिक ‘डिस्पोजेबल इनकम’ छोड़ना है।

फॉर्म 16 की जगह अब ‘फॉर्म 130’ का दौर

टैक्स रिफंड के दावों के लिए अब कर्मचारियों को एक नए दस्तावेज़ से रूबरू होना होगा। सालों से चले आ रहे ‘फॉर्म 16’ (TDS सर्टिफिकेट) को अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसकी जगह अब फॉर्म 130′ ने ले ली है।

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यह नया फॉर्म पहले से कहीं अधिक विस्तृत और ‘सिस्टम-जेनरेटेड’ है। इसमें एआई (AI) आधारित डेटा एंट्री का उपयोग किया गया है, जिससे डेटा मिसमैच की संभावनाएं 90% तक कम हो गई हैं। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि अपना रिटर्न फाइल करते समय या नियोक्ता (Employer) से फॉर्म 130 डाउनलोड करते समय यह सुनिश्चित करें कि उन्होंने नए नियमों के तहत संशोधित डिडक्शन को क्लेम किया है।

मध्यम वर्ग पर प्रभाव: सांख्यिकीय नजरिया

वित्त विशेषज्ञों के अनुसार, इस नए अधिनियम से देश के लगभग 3.5 करोड़ नौकरीपेशा लोगों को सीधा फायदा होगा।

  • आय वर्ग ₹7-10 लाख: इस वर्ग के करदाताओं के टैक्स लायबिलिटी में औसतन 15% की कमी आने का अनुमान है।
  • रिफंड की गति: आयकर विभाग ने दावा किया है कि नए डिजिटल ढांचे (Tax-Tech 3.0) के कारण रिफंड मिलने की औसत अवधि अब केवल 3 से 5 दिन रह जाएगी।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि ‘टैक्स ईयर’ की नई अवधारणा और धाराओं के सरलीकरण (819 से घटाकर 536) से कर चोरी में कमी आएगी और ईमानदारी से टैक्स भरने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, करदाताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि नए अधिनियम के तहत कुछ पुरानी रियायतों (Exemptions) को युक्तिसंगत बनाया गया है, इसलिए निवेश के दावों (जैसे 80C) के लिए अब नए ‘चैप्टर VIII’ के संगत अनुभागों का उपयोग करना अनिवार्य होगा।

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