मांड्या (कर्नाटक)-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज कर्नाटक के मांड्या जिले के एक दिवसीय दौरे पर हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व के ‘श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर’ का उद्घाटन करना और क्षेत्र के लोगों को संबोधित करना है।
आदिचुंचनगिरि मठ में भव्य कार्यक्रम
प्रधानमंत्री सुबह करीब 11:00 बजे श्री क्षेत्र आदिचुंचनगिरि पहुँचेंगे। यहाँ वे श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर (गदुगे) को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह मंदिर आदिचुंचनगिरि महासंस्थान मठ के 71वें पीठाधीश्वर, दिवंगत श्री श्री श्री डॉ. बालगांगाधरनाथ महास्वामीजी की स्मृति में बनाया गया एक भव्य स्मारक है।
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परंपरागत द्रविड़ वास्तुकला शैली में निर्मित यह मंदिर न केवल एक पूजा स्थल है, बल्कि स्वामीजी द्वारा शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के प्रति एक श्रद्धांजलि भी है। उद्घाटन के बाद, पीएम मोदी प्रसिद्ध श्री कालभैरवेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे।
प्रमुख अपडेट्स और कार्यक्रम की रूपरेखा:
- पुस्तकों का विमोचन: प्रधानमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के साथ ‘सौंदर्य लहरी’ और ‘शिव महिम्न स्तोत्रम’ नामक पुस्तकों का संयुक्त रूप से विमोचन करेंगे।
- दिग्गजों की उपस्थिति: कार्यक्रम में कर्नाटक के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और मठ के वर्तमान पीठाधीश्वर श्री निर्मलानंदनाथ स्वामीजी उपस्थित रहेंगे।
- विशाल जनसभा: मंदिर के उद्घाटन के बाद, पीएम मोदी नागसांद्रा के पास एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे, जिसमें लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद है।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रधानमंत्री की यात्रा को देखते हुए मांड्या जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। आदिचुंचनगिरि मठ के आसपास के क्षेत्र में सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक आम जनता के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था में 3,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह दौरा कर्नाटक के ‘ओल्ड मैसूर’ क्षेत्र में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। डॉ. बालगांगाधरनाथ स्वामीजी ने अपने जीवनकाल में 500 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की थी, जिससे यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
प्रधानमंत्री का यह दौरा कर्नाटक की विकास परियोजनाओं और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर चलने के उनके संकल्प ‘विरासत भी, विकास भी’ को दर्शाता है।







