सैन फ्रांसिस्को में नई पर्यावरण तकनीकों और निवेश पर मंथन भारतीय स्टार्टअप्स अपनी ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ से बिखेर रहे हैं चमक।
सैन फ्रांसिस्को आज से वैश्विक पर्यावरण के भविष्य को नई दिशा देने के लिए ‘सैन फ्रांसिस्को (SF) क्लाइमेट वीक 2026’ का भव्य आगाज हो गया है। अमेरिका के कैलिफोर्निया में आयोजित यह सात दिवसीय कार्यक्रम इस साल का सबसे बड़ा जलवायु शिखर सम्मेलन बनकर उभरा है। इस आयोजन में दुनिया भर के 60,000 से अधिक वैज्ञानिक, पर्यावरण प्रेमी, नीति निर्माता और निवेशक एक छत के नीचे जमा हुए हैं।
विज्ञान का नया सवेरा जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने मिलाया क्वांटम कंप्यूटिंग से हाथ
अल गोर और बड़े दिग्गजों की मौजूदगी
इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण पूर्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति और नोबेल पुरस्कार विजेता अल गोर हैं, जिन्होंने उद्घाटन सत्र में जलवायु संकट की गंभीरता पर जोर दिया। इस वर्ष का उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि ‘नेट जीरो’ (Net Zero) लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए व्यावहारिक निवेश और नई तकनीकों को धरातल पर उतारना है।
प्रमुख आंकड़े और मुख्य एजेंडा
महिला आरक्षण बिल पर आर-पार संसद में बिल गिरने के बाद देशभर में सड़कों पर उतरा NDA
भागीदारी 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और 500 से अधिक पर्यावरण स्टार्टअप्स।
- निवेश लक्ष्य इस साल के कार्यक्रम में हरित परियोजनाओं (Green Projects) के लिए $250 बिलियन के संभावित निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
- मुख्य विषय कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture)।
भारत का दम ग्रीन टेक में भारतीय स्टार्टअप्स की धूम
‘SF क्लाइमेट वीक 2026’ में भारत की ओर से एक मजबूत प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहा है। भारत के लगभग 25 से अधिक स्टार्टअप्स अपनी स्वदेशी ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ का प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें सौर ऊर्जा से चलने वाले कोल्ड स्टोरेज, प्लास्टिक मुक्त पैकेजिंग समाधान और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नई बैटरी तकनीक शामिल हैं।
भारतीय उद्यमियों का मुख्य फोकस कम लागत वाली उन तकनीकों पर है, जो विकासशील देशों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ये तकनीकें वैश्विक स्तर पर जलवायु लक्ष्यों को पाने में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।
SF क्लाइमेट वीक केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि दुनिया अब पर्यावरण को लेकर गंभीर है। आने वाले छह दिनों में होने वाली चर्चाएं और तकनीकें यह तय करेंगी कि हम आने वाली पीढ़ियों को कैसी धरती सौंपेंगे।







