धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए पहली बार लेनदेन पर ‘1 घंटे की विंडो’ का प्रस्ताव जानें कैसे सुरक्षित होगा आपका पैसा।
मुंबई-भारत में डिजिटल लेनदेन की क्रांति लाने वाले UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) में सुरक्षा की एक नई परत जुड़ने जा रही है। देश में बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और स्कैम के मामलों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक क्रांतिकारी प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव के तहत, एक निश्चित राशि से अधिक के लेनदेन पर ‘1 घंटे का पॉज’ बटन लागू किया जा सकता है।
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क्या है 1 घंटे का ‘होल्ड’ नियम?
अक्सर देखा गया है कि जालसाज लोगों को डराकर या लालच देकर जल्दबाजी में बड़ी रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं। RBI के नए प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई यूजर किसी नए प्राप्तकर्ता (First-time receiver) को एक बड़ी राशि (जैसे ₹5,000 या ₹10,000 से अधिक) भेजता है, तो पैसा तुरंत खाते से नहीं कटेगा।
इसके बजाय, उस लेनदेन को 1 घंटे के लिए ‘होल्ड’ पर रखा जाएगा। इस दौरान यूजर के पास उस ट्रांजैक्शन को रद्द करने या उसकी पुष्टि करने का विकल्प होगा। यह विंडो विशेष रूप से उन लोगों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी जो अनजाने में गलत खाते में पैसे भेज देते हैं या ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे घोटालों का शिकार हो जाते हैं।
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आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं
भारत में डिजिटल भुगतान जितनी तेजी से बढ़ रहा है, साइबर अपराध भी उतनी ही रफ्तार पकड़ रहे हैं
- NPCI डेटा-मार्च 2026 तक भारत में प्रति माह 15 बिलियन से अधिक UPI लेनदेन दर्ज किए गए।
- साइबर फ्रॉड-गृह मंत्रालय के पोर्टल के अनुसार, 2025-26 में डिजिटल धोखाधड़ी की शिकायतों में 35% की वृद्धि हुई है।
- रिकवरी दर-वर्तमान में धोखाधड़ी से गए पैसे को वापस पाने की दर मात्र 10-15% है, क्योंकि पैसा तुरंत कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
आम जनता पर क्या होगा असर?
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि इससे ‘इंस्टेंट भुगतान’ की सुविधा थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह एक बड़ा कदम है। छोटी राशि के भुगतान और नियमित रूप से किए जाने वाले पेमेंट्स (जैसे बिजली बिल, किराने का सामान) पर यह नियम लागू नहीं होगा।
RBI इस समय विभिन्न बैंकों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ मिलकर इस प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा है। यदि यह लागू होता है, तो भारत डिजिटल सुरक्षा के मामले में विश्व स्तर पर एक नई मिसाल पेश करेगा।







