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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में ‘ई-मेंशनिंग’ से जमानत याचिकाओं में आई रफ़्तार, कैदियों को बड़ी राहत

By: डिजिटल डेस्क

On: Tuesday, April 28, 2026 2:00 PM

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जबलपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश न्यायपालिका में तकनीक के समावेश ने न्याय की गति को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। राज्य के उच्च न्यायालय की जबलपुर (मुख्य पीठ), इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में 6 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुई ‘ई-मेंशनिंग’ (E-Mentioning) सुविधा का सकारात्मक असर अब धरातल पर साफ दिखने लगा है। इस नई व्यवस्था ने न केवल वकीलों के काम को आसान बनाया है, बल्कि जेलों में बंद उन विचाराधीन कैदियों के लिए भी न्याय के द्वार तेजी से खोले हैं, जिनकी जमानत याचिकाएं लंबे समय से लंबित थीं।

क्या है ‘ई-मेंशनिंग’ और कैसे करती है काम?

साधारण शब्दों में, ‘मेंशनिंग’ वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से वकील न्यायाधीश से किसी मामले की तत्काल सुनवाई (Urgent Hearing) का अनुरोध करते हैं। पहले यह प्रक्रिया भौतिक रूप से होती थी, जिसमें समय और श्रम अधिक लगता था।

  • ERP मॉड्यूल: अब उच्च न्यायालय ने अपने ERP मॉड्यूल के माध्यम से इस प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है।
  • समय सीमा: वकील सुबह 10:00 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से ‘मेंशन मेमो’ फाइल कर सकते हैं, जिस पर उसी कार्य दिवस (Working Day) में सुनवाई की संभावना रहती है। इसके बाद फाइल किए गए मेमो पर अगले दिन विचार किया जाता है।

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जमानत याचिकाओं पर “सुपरफास्ट” असर

इस डिजिटल बदलाव का सबसे बड़ा लाभ जमानत (Bail) याचिकाओं को मिला है। जेलों में बंद कई ऐसे कैदी थे जिनकी याचिकाएं तकनीकी देरी या मेंशनिंग न हो पाने के कारण महीनों से कतार में थीं।

  1. त्वरित सूचीबद्धता: ई-मेंशनिंग के जरिए अब वकील कोर्ट को केस की अति-आवश्यकता (Extreme Urgency) तुरंत समझा पाते हैं।
  2. पारदर्शिता: सिस्टम डिजिटल होने के कारण अब यह ट्रैक करना आसान है कि किस याचिका पर कब और क्या निर्देश दिए गए हैं।
  3. लंबित मामलों में कमी: पिछले 20 दिनों के डेटा के अनुसार, मेंशन किए गए मामलों में से लगभग 40% मामले जमानत से संबंधित हैं, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुना जा रहा है।

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न्यायिक सक्रियता और पारदर्शिता

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल, न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा और अन्य न्यायाधीशों की पीठों ने अलग-अलग हाइब्रिड और ई-मेंशनिंग मोड को अपनाकर इस प्रक्रिया को और लचीला बनाया है। विशेष रूप से सिंगरौली और सीधी जैसे दूरस्थ जिलों के वकीलों के लिए यह वरदान साबित हो रहा है, जिन्हें अब छोटी-छोटी अर्जियों के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अनिवार्य बाध्यता से मुक्ति मिल रही है।

सांख्यिकी और महत्वपूर्ण जानकारी

  • प्रभावी तिथि: 06 अप्रैल 2026।
  • उपलब्धता: मुख्य पीठ जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ।
  • प्रमुख लाभ: मानवीय हस्तक्षेप में कमी, समय की बचत और जेलों में कैदियों की बढ़ती भीड़ पर नियंत्रण।

हाई कोर्ट की इस पहल ने यह सिद्ध कर दिया है कि ‘न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर है’ और तकनीक इस देरी को खत्म करने का सबसे सशक्त माध्यम है।

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