जबलपुर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कड़े निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘मुक्ति वाहन योजना’ (मुफ्त शव वाहन सेवा) का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि केवल सुविधा शुरू कर देना काफी नहीं है, बल्कि उसका व्यापक प्रचार-प्रसार करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
PIL पर सुनवाई: हेल्पलाइन नंबर को लेकर उठे सवाल
अदालत में दायर जनहित याचिका में यह मुद्दा उठाया गया था कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में लोगों को परिजनों की मृत्यु के बाद शवों को घर या श्मशान ले जाने के लिए निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो अक्सर भारी वसूली करते हैं। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि राज्य सरकार की मुफ्त सेवा की जानकारी न होने के कारण गरीब जनता इसका लाभ नहीं उठा पा रही है।
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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि प्रदेश में पहले ही एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर और शव वाहन सेवा स्थापित की जा चुकी है।
कोर्ट का फैसला: जागरूकता ही असली समाधान
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि जब बुनियादी ढांचा (Infrastructure) तैयार है, तो अब जन-जागरूकता (Public Awareness) पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
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अदालत के प्रमुख निर्देश:
- सरकारी अस्पतालों, नगर निगम कार्यालयों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर योजना और हेल्पलाइन नंबर के बोर्ड लगाए जाएँ।
- रेडियो, समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से इस सेवा का नियमित विज्ञापन दिया जाए।
- प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि टोल-फ्री नंबर 24×7 सक्रिय रहे और कॉल करने पर तुरंत सहायता उपलब्ध हो।
क्या है मध्य प्रदेश मुक्ति वाहन योजना? (तथ्य और आंकड़े)
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य निर्धन परिवारों को सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए मुफ्त परिवहन सुविधा प्रदान करना है।
| सेवा का नाम | विवरण |
| लाभार्थी | मध्य प्रदेश के समस्त नागरिक (विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर) |
| सुविधा | अस्पताल से घर या श्मशान तक मुफ्त शव वाहन |
| लागत | पूर्णतः निःशुल्क |
| कार्यक्षेत्र | सभी जिले और नगरीय निकाय |
सम्मानजनक विदाई का अधिकार
हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि “सम्मान के साथ अंतिम विदाई हर नागरिक का अधिकार है।” कोर्ट के इस रुख के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग इस योजना के प्रचार के लिए विशेष अभियान चलाएंगे, ताकि कोई भी गरीब व्यक्ति जानकारी के अभाव में इस सेवा से वंचित न रहे।







