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पंखा लगाने के विवाद में अपनों पर ही दर्ज कराया था केस, अब न्यायालय ने किया दोषमुक्त

By: डिजिटल डेस्क

On: Tuesday, May 12, 2026 1:26 AM

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singrauli-court-acquits-family-members-bns-case-annu-saket-सिंगरौली जिले के वैढन स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पारिवारिक कलह से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। पीठासीन अधिकारी शिवचरण पटेल ने साक्ष्यों के अभाव और फरियादी के मुकर जाने के कारण सुरेंद्र साकेत और उनके दो बच्चों को अश्लील गाली-गलौज के आरोपों से बरी कर दिया है ।

क्या था पूरा मामला?

अभियोजन की कहानी के अनुसार, विवाद की शुरुआत 03 अप्रैल, 2026 को दोपहर करीब 12:00 बजे हुई थी । ग्राम चंदावल निवासी फरियादी अन्नू साकेत ने थाना विंध्यनगर में शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह प्लांट ड्यूटी से घर लौटा, तो उसकी बहन रीता (रीना) साकेत पंखा लगाने की बात पर विवाद करने लगी । आरोप था कि बहन ने पत्थर मारकर उसे घायल कर दिया और बाद में उसके भाई लालबादशाह और पिता सुरेंद्र साकेत ने भी उसके साथ मारपीट की ।

पारिवारिक विवाद में गाली-गलौज के आरोपियों को न्यायालय ने किया दोषमुक्त

कानूनी धाराओं का शिकंजा और राजीनामा

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की निम्नलिखित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी:

  • धारा 296: सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्द या गाली-गलौज 。
  • धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुँचाना 。
  • धारा 3(5): सामान्य मंशा (जब कई लोग मिलकर अपराध करें) 。

मामले की सुनवाई के दौरान 06 मई, 2026 को फरियादी अन्नू साकेत और आरोपियों के बीच आपसी समझौता (राजीनामा) हो गया  कानून के अनुसार, मारपीट (115(2)) और सामान्य मंशा (3(5)) की धाराएँ समझौते के योग्य थीं, इसलिए आरोपियों को इनसे तुरंत दोषमुक्त कर दिया गया  हालांकि, धारा 296 (अश्लील गाली-गलौज) अशमनीय होने के कारण न्यायालय ने इस पर विचारण जारी रखा 。

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न्यायालय का फैसला: गवाह के मुकरने से गिरा केस

न्यायालय में गवाही के दौरान मामला पूरी तरह पलट गया। फरियादी अन्नू साकेत (अ.सा.-1) ने अपने मुख्य परीक्षण में स्वीकार किया कि आरोपी उसके सगे पिता और भाई-बहन हैं और उनके बीच केवल मामूली वाद-विवाद हुआ था 。 उसने पुलिस को दिए गए अपने पिछले बयानों और गाली-गलौज की बात से पूरी तरह इनकार कर दिया 。

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवचरण पटेल ने पाया कि अभिलेख पर ऐसा कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है जिससे यह प्रमाणित हो सके कि आरोपियों ने सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्दों का प्रयोग किया था 。 साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने सुरेंद्र साकेत, रीना साकेत और लालबादशाह साकेत को धारा 296 के अपराध से दोषमुक्त करते हुए ससम्मान बरी कर दिया 。

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