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पारिवारिक विवाद में गाली-गलौज के आरोपियों को न्यायालय ने किया दोषमुक्त

By: डिजिटल डेस्क

On: Tuesday, May 12, 2026 1:17 AM

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सिंगरौली-सिंगरौली जिले के वैढन स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने गाली-गलौज और मारपीट के एक मामले में दो सगे भाइयों को दोषमुक्त करार दिया है । यह निर्णय पीठासीन अधिकारी शिवचरण पटेल द्वारा सुनाया गया ।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार, घटना 18 मार्च, 2026 की दोपहर करीब 2 बजे थाना विंध्यनगर के अंतर्गत गहिलगढ़ की है । फरियादी संगीता शाह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि जब वह रसोई में खाना बना रही थी, तब उनके देवर विकास कुमार गुप्ता (29 वर्ष) और अभिषेक कुमार गुप्ता (24 वर्ष) ने उनके साथ गाली-गलौज की और हाथ-मुक्का से मारपीट की । बीच-बचाव करने आए फरियादी के पति अरविंद कुमार शाह के साथ भी मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया था ।

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कानूनी कार्यवाही और राजीनामा

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 296 (अश्लील शब्द/गाली-गलौज), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 351(3) (आपराधिक धमकी) और 3(5) (सामान्य मंशा) के तहत मामला दर्ज किया था ।

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विचारण के दौरान, फरियादी पक्ष और अभियुक्तों के बीच आपसी समझौता (राजीनामा) हो गया । राजीनामे के आधार पर धारा 115(2), 351(3) और 3(5) के आरोपों से उन्हें पहले ही दोषमुक्त कर दिया गया था । हालाँकि, धारा 296 (गाली-गलौज) के अशमनीय (Non-compoundable) होने के कारण इस पर विचारण जारी रहा ।

न्यायालय का निष्कर्ष

न्यायालय के समक्ष गवाही के दौरान फरियादी संगीता शाह और उनके पति अरविंद कुमार शाह अपने पूर्व के बयानों से मुकर गए । उन्होंने न्यायालय में स्वीकार किया कि अभियुक्तों के साथ उनका मामूली विवाद हुआ था और अब उनके बीच राजीनामा हो चुका है । साक्षियों ने पुलिस को दिए गए मारपीट और गाली-गलौज के बयानों से भी इनकार कर दिया ।

साक्ष्यों के अभाव और मुख्य गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण, न्यायालय ने पाया कि अभियुक्तों द्वारा सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्दों के प्रयोग का आरोप प्रमाणित नहीं होता है । परिणामस्वरूप, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने विकास कुमार गुप्ता और अभिषेक कुमार गुप्ता को धारा 296 के आरोपों से भी दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।

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