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पृथ्वी दिवस पर भारत की ‘कंचन’ वाली कामयाबी-कचरे से कमाए ₹4,000 करोड़,

By: डिजिटल डेस्क

On: Wednesday, April 22, 2026 2:51 PM

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नई दिल्ली/प्रयागराज-आज 22 अप्रैल 2026 को पूरी दुनिया ‘पृथ्वी दिवस’ (Earth Day) मना रही है। इस अवसर पर भारत ने न केवल पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया है, बल्कि आर्थिक और पारिस्थितिक संतुलन का एक अनूठा उदाहरण भी पेश किया है। केंद्र सरकार के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (कचरे से कंचन) मिशन के तहत भारत ने कबाड़ के प्रबंधन और पुनर्चक्रण (Recycling) के जरिए ₹4,000 करोड़ की आय अर्जित कर एक नया मील का पत्थर पार कर लिया है।

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प्रयागराज से कन्याकुमारी तक जागरूकता की गूंज

आज सुबह से ही देशभर के विभिन्न हिस्सों में ‘प्लास्टिक मुक्त भारत’ और ‘जल संरक्षण’ को लेकर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।

  • प्रयागराज-संगम तट पर हज़ारों स्वयंसेवकों और पर्यटकों ने नदियों को स्वच्छ रखने की शपथ ली। यहाँ ‘क्लीन गंगा’ मिशन के तहत विशेष ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किया गया जो जल की सतह से प्लास्टिक कचरा हटाने में सक्षम है।
  • कन्याकुमारी-दक्षिण भारत के इस छोर पर स्थानीय समुदायों ने ‘जीरो वेस्ट बीच’ अभियान शुरू किया, जिसमें पर्यटकों को कचरा न फैलाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
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वेस्ट टू वेल्थ-कचरा अब समस्या नहीं, संपत्ति है

भारत की इस सफलता के पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जन-भागीदारी है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार

  1. ई-वेस्ट और धातु पुनर्चक्रण- ₹4,000 करोड़ की कुल कमाई का बड़ा हिस्सा पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान और सरकारी कार्यालयों के कबाड़ को वैज्ञानिक तरीके से निपटाने से आया है।
  2. सर्कुलर इकोनॉमी- देश में 50 से अधिक नए ‘वेस्ट-टू-एनर्जी’ प्लांट सक्रिय हुए हैं, जो शहरी कचरे से बिजली और जैविक खाद तैयार कर रहे हैं।
  3. रोजगार सृजन-इस अभियान ने पिछले एक साल में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 1.5 लाख लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं।

संकल्प से सिद्धि की ओर

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि “पृथ्वी हमारी माता है और इसकी रक्षा हमारा परम कर्तव्य है।” विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह मॉडल दुनिया के अन्य विकासशील देशों के लिए एक मार्गदर्शक बन सकता है, जहाँ कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। आज का दिन यह याद दिलाता है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो हम अपनी धरती को हरा-भरा रखने के साथ-साथ विकास की नई ऊंचाइयों को भी छू सकते हैं।

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