नई दिल्ली-भारत केवल सूचना प्रौद्योगिकी (IT) का केंद्र ही नहीं रहा, बल्कि अब यह स्वास्थ्य तकनीक (Health Tech) के क्षेत्र में भी दुनिया का मार्गदर्शक बनकर उभरा है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत स्वास्थ्य (Personal Health) के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करने के मामले में भारत अब दुनिया में नंबर-1 स्थान पर पहुंच गया है।
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विकसित देशों से भी आगे निकला भारत
आंकड़े बताते हैं कि भारत में 85% उपभोक्ता स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और निगरानी के लिए किसी न किसी रूप में AI-संचालित उपकरणों (जैसे स्मार्टवॉच, फिटनेस ट्रैकर और एआई डायग्नोस्टिक ऐप्स) का उपयोग कर रहे हैं। यह आंकड़ा अमेरिका (लगभग 60%) और ब्रिटेन जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देशों की तुलना में काफी अधिक है।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में स्मार्टफोन की आसान पहुंच और सस्ते डेटा ने इस ‘डिजिटल हेल्थ रिवोल्यूशन’ की नींव रखी है।
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AI कैसे बदल रहा है भारतीयों की जीवनशैली?
हेल्थकेयर में एआई का मतलब केवल रोबोटिक सर्जरी नहीं है, बल्कि यह आम आदमी की जेब तक पहुंच गया है:
- बीमारियों का शुरुआती पता- एआई ऐप्स अब हार्ट रेट, नींद के पैटर्न और ऑक्सीजन लेवल का विश्लेषण कर संभावित बीमारियों की चेतावनी पहले ही दे देते हैं।
- पर्सनलाइज्ड डाइट और फिटनेस- भारतीयों के बीच कस्टमाइज्ड फिटनेस प्लान के लिए एआई कोच का चलन तेजी से बढ़ा है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच- टेलीमेडिसिन और एआई-संचालित चैटबॉट्स के जरिए दूर-दराज के गांवों में भी विशेषज्ञों जैसी सलाह मिल पा रही है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
हालांकि भारत इस मामले में शीर्ष पर है, लेकिन विशेषज्ञों ने डेटा गोपनीयता (Data Privacy) और सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। सरकार की ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ जैसी पहल इस दिशा में एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार कर रही है।यह उपलब्धि केवल एक सांख्यिकीय जीत नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत की उस तस्वीर को दिखाती है जहाँ तकनीक का उपयोग जीवन को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में, स्वास्थ्य सेवा में एआई का यह एकीकरण भारत की औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।







