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भारतीय सीफूड का वैश्विक बाजार में डंका-निर्यात ने तोड़ा रिकॉर्ड,

By: डिजिटल डेस्क

On: Wednesday, April 22, 2026 2:39 PM

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नई दिल्ली-भारतीय मत्स्य पालन और समुद्री उत्पाद क्षेत्र ने एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत का समुद्री भोजन निर्यात (Seafood Exports) सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष कुल निर्यात मूल्य ₹72,325 करोड़ (लगभग 8.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर) दर्ज किया गया है। यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी की तरह है, विशेषकर ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।

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अमेरिकी चुनौती और भारतीय रणनीति

इस रिकॉर्ड उछाल की सबसे बड़ी बात यह है कि यह सफलता प्रतिकूल परिस्थितियों में हासिल की गई है। भारत के सबसे बड़े सीफूड बाजार, अमेरिका ने इस साल भारतीय झींगे (Shrimp) पर आयात शुल्क (Import Duty) में बढ़ोतरी कर दी थी। माना जा रहा था कि इससे निर्यात को बड़ा झटका लगेगा। लेकिन, भारतीय निर्यातकों ने चतुराई से अपनी रणनीति बदली और नए बाजारों पर ध्यान केंद्रित किया।

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चीन और EU में भारी मांग

अमेरिका में आई सुस्ती की भरपाई चीन और यूरोपीय संघ (EU) के बाजारों ने की। वित्त वर्ष 26 में

  • चीन- भारतीय झींगे और अन्य मछलियों की मांग में चीन में अभूतपूर्व बढ़ोतरी देखी गई, जिससे वह भारत के लिए एक प्रमुख बाजार बन गया।
  • यूरोपीय संघ- गुणवत्ता और पैकेजिंग में सुधार के बाद, यूरोपीय देशों को होने वाले निर्यात में भी दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई।
  • दक्षिण पूर्व एशिया- वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों ने भी भारतीय कच्चे माल (Processing के लिए) की भारी खरीदारी की।

निर्यात में मुख्य उत्पाद

भारतीय समुद्री भोजन निर्यात में फ्रोज़न झींगा (Frozen Shrimp) का दबदबा बरकरार है, जो कुल निर्यात मूल्य का लगभग 65% हिस्सा है। इसके बाद फ्रोज़न मछली, स्क्विड (Squid) और कटलफिश (Cuttlefish) का स्थान है। सरकार की ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) ने भी उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अपनी लॉजिस्टिक्स लागत को कम करता है और मूल्य-वर्धित उत्पादों (Value-Added Products) पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है, तो अगले दो वर्षों में यह निर्यात ₹1 लाख करोड़ के जादुई आंकड़े को भी छू सकता है। यह रिकॉर्ड उछाल न केवल विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत कर रहा है, बल्कि तटीय राज्यों के लाखों मछुआरों और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद कर रहा है।

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