बैढ़न के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सिमरन गुप्ता की अदालत ने नौ साल पुराने एक पारिवारिक झगड़े पर फैसला सुना दिया, जिसमें ग्राम बनौली की मां फूलमती शाह और उनकी दो बेटियां मंजू व सरोज शाह को पड़ोसी महिला अनीता शाह पर मारपीट का दोषी ठहराया। 28 मार्च 2026 को आए इस फैसले ने आरसीटी नंबर 245/2017 को अंतिम रूप दिया, जहां तीनों को अदालत उठने तक निरोध और प्रति व्यक्ति हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। यह निर्णय गांवों में छोटे विवादों के बड़े नतीजों की याद दिलाता है।
सुबह का खौफनाक हमला
9 मार्च 2017 की सुबह आठ बजकर तीस मिनट पर बनौली गांव में अनीता शाह के साथ पड़ोस की इन तीन महिलाओं ने गाली-गलौज शुरू कर दिया। बात बिगड़ते ही लाठी-डंडों और मुक्कों से हमला बोल दिया, जिससे अनीता को हाथ, पेट व गर्दन पर गंभीर चोटें लगीं। अगले दिन 10 मार्च को विंध्यनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई, जो सालों तक कोर्ट की चौखट पर लड़ी। पीड़िता के बयान ने पूरे मामले को मजबूती दी।
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साक्ष्यों ने तोला तराजू
अभियोजन ने पांच गवाह उतारे, जिनमें पीड़िता अनीता (गवाह नंबर 1) ने साफ बताया कि आरोपियों ने लकड़ी के बेंत से पीटा। मेडिकल अफसर डॉ. मीनाक्षी पटेल ने रिपोर्ट में पुष्टि की कि चोटें कठोर व कुंद वस्तु से लगीं, हालांकि सामान्य प्रकृति की। इन प्रमाणों ने मारपीट (धारा 323) के आरोप को पुख्ता कर दिया, जबकि गालियां व धमकी के दावे कमजोर पड़ गए।
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आधी राहत, आधी सजा
कोर्ट ने मां-बहन की गालियों को अश्लीलता (धारा 294) की हद से बाहर माना, क्योंकि वे यौन संदर्भित नहीं। जान मारने की धमकी (धारा 506) पर भी साक्ष्य अपर्याप्त पाए। लेकिन मारपीट पर कोई ढील नहीं, इसलिए दोषसिद्धि हुई। जुर्माना न भरा तो 15-15 दिन अतिरिक्त जेल, बिना प्रोबेशन के। न्यायाधीश ने तर्क दिया कि समाज में बढ़ते हिंसक विवादों को कुचलना जरूरी।
गांव की सीख भरा फैसला
फूलमती (45), मंजू (21) व सरोज (19) पर यह सजा छोटी लगे, लेकिन देरी से न्याय मिलने का संदेश बड़ा है। बैढ़न जैसे इलाकों में जहां पारिवारिक झगड़े आम हैं, यह फैसला शांति की अपील करता है। पीड़िता को न्याय मिला, आरोपी परिवार को सबक। अब गांव में शायद शांति लौटे।







