वैढन, सिंगरौली: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े एक गंभीर घोटाले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, सिंगरौली (मुख्यालय वैढन) ने शासकीय उचित मूल्य दुकान बनौली के पूर्व विक्रेता कृष्ण मुरारी पाण्डेय की अग्रिम जमानत याचिका को 08 अप्रैल 2026 को खारिज कर दिया।
मामले के अनुसार, आरोपी पर ₹2,88,384 मूल्य के गेहूँ, चावल, शक्कर और नमक के गबन का आरोप है। यह खाद्यान्न गरीबों के लिए निर्धारित था, जिसे कथित रूप से वितरण के बजाय हड़प लिया गया। इस संबंध में 05 अप्रैल 2026 को अपराध क्रमांक 412/2026 दर्ज किया गया, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 316(5) और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 लागू की गई हैं।
गवाहों के बयान से मजबूत हुआ मामला
जांच के दौरान सामने आए गवाहों के बयान मामले को गंभीर बनाते हैं। परिवहनकर्ता राजेन्द्र प्रसाद शाह ने बताया कि 24 दिसंबर 2025 को भारी मात्रा में खाद्यान्न दुकान तक पहुंचाया गया था, लेकिन उसे POS मशीन में दर्ज नहीं किया गया।
वहीं, समिति प्रबंधक ने खुलासा किया कि 31 दिसंबर 2025 को दुकान बंद मिलने पर ताला तोड़कर स्टॉक की जांच की गई, जिसमें भारी कमी पाई गई। ग्रामीण हितग्राहियों ने भी आरोप लगाया कि उनसे अंगूठा लगवाया गया, लेकिन अनाज नहीं दिया गया।
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जांच और अभियोजन में दिखीं खामियां
हालांकि, इस मामले में जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष की कुछ कमियां भी सामने आई हैं। घटना नवंबर-दिसंबर 2025 की है, लेकिन FIR लगभग 4 महीने बाद दर्ज हुई, जिससे साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ती है।
इसके अलावा, POS मशीन के तकनीकी दुरुपयोग या स्टॉक रजिस्टर में हेराफेरी के स्पष्ट प्रमाण अभी तक जांच में सामने नहीं आए हैं। अभियोजन ने भी आरोपी के ‘षड्यंत्र’ वाले आरोपों पर विस्तृत लिखित जवाब प्रस्तुत नहीं किया।
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न्यायालय की टिप्पणी और कानूनी दृष्टिकोण
न्यायाधीश धर्मेन्द्र सोनी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है, जिसे केवल विशेष परिस्थितियों में ही दिया जाना चाहिए। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि केस डायरी में ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला जिससे लगे कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है।
अदालत ने यह भी कहा कि गरीबों के लिए निर्धारित राशन का गबन समाज के प्रति गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में नरमी बरतना न्यायोचित नहीं होगा।
यह फैसला न केवल सिंगरौली बल्कि पूरे प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक मजबूत संदेश देता है। अदालत का यह रुख स्पष्ट करता है कि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ न्यायपालिका सख्ती से पेश आएगी।







