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खाकी पर दाग मध्य प्रदेश में 36 लाख की ‘सोना चोरी’ मामले में 5 पुलिसकर्मी निलंबित, 

By: डिजिटल डेस्क

On: Thursday, April 23, 2026 9:54 AM

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इंदौर/भोपाल: मध्य प्रदेश के इंदौर जिले से पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में एक व्यापारी के घर छापेमारी के दौरान लगभग 36 लाख रुपये मूल्य का सोना (करीब 22.50 तोला) चोरी करने के आरोप में एक उप-निरीक्षक (SI) समेत पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, लसूड़िया थाने की एक टीम एक पुराने चेक बाउंस मामले में वारंट तामील करने के लिए व्यापारी गौरव जैन के घर पहुंची थी। पीड़ित व्यापारी का आरोप है कि पुलिसकर्मी किसी पेशेवर अपराधियों की तरह उनके घर में दाखिल हुए। उन्होंने घर में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों को बंद कर दिया और तलाशी के बहाने अलमारी और दराजों में रखा लगभग 22.50 तोला सोना और कुछ चांदी के बर्तन पार कर दिए।

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व्यापारी ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि पुलिसकर्मियों ने उनके परिवार के साथ बदसलूकी की और मास्टर चाबी का उपयोग कर ताले खोले। व्यापारी द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को साक्ष्य और डिजिटल ट्रांजेक्शन के सबूत सौंपने के बाद विभाग हरकत में आया।

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वरिष्ठ अधिकारियों की सख्त कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर के डीसीपी (जोन-2) कुमार प्रतीक ने प्राथमिक जांच के बाद पांचों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित होने वालों में:

  • संजय विश्नोई (सब-इंस्पेक्टर)
  • प्रवीण भदोरिया (पुलिसकर्मी)
  • दिनेश जाट (पुलिसकर्मी)
  • रविंद्र कुशवाहा (पुलिसकर्मी)
  • एक हेड कांस्टेबल

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (ADCP) अमरेंद्र सिंह ने पुष्टि की है कि इन कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में आरोप पूर्णतः सत्य पाए जाते हैं, तो इनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण (FIR) भी दर्ज किया जाएगा।

प्रशासनिक पारदर्शिता पर उठते सवाल

इस घटना ने मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली और ‘प्रशासनिक पारदर्शिता’ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए सवाल किया है कि क्या “रक्षक ही भक्षक” बन रहे हैं? स्थानीय लोगों और व्यापारिक संगठनों में इस घटना को लेकर काफी रोष है।

वर्तमान में, एसीपी (विजयनगर) इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रहे हैं। पुलिस विभाग अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि इस घटना से जनता के बीच पुलिस का विश्वास कम न हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।

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