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नशीली कफ सीरप तस्करी मामला सिंगरौली कोर्ट का सख्त फैसला, आरोपी दीपेश साहू की जमानत याचिका निरस्त

By: डिजिटल डेस्क

On: Thursday, April 23, 2026 11:51 AM

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सिंगरौली (बैढ़न): मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है । जिला न्यायालय सिंगरौली के विशेष न्यायाधीश (NDPS एक्ट) उमेश कुमार सोनी ने नशीली कफ सीरप की तस्करी के आरोपी दीपेश कुमार साहू की नियमित जमानत याचिका को गंभीर अपराध मानते हुए सिरे से खारिज कर दिया है ।

बोलेरो से बरामद हुई थी 820 शीशी नशीली कफ सीरप

अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, यह मामला 23 अगस्त 2025 का है । थाना सरई के अंतर्गत चौकी निवास पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक सफेद रंग की बोलेरो नियो गाड़ी में अवैध रूप से नशीली कफ सीरप की खेप सीधी-सरई मार्ग से ले जाई जा रही है ।

पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घेराबंदी की, जिसके दौरान वाहन चालक और उसके बगल में बैठा व्यक्ति भागने में सफल रहे । हालांकि, मौके से तीन अन्य आरोपी राजीव शुक्ला, राकेश कुमार साहू और अंकुश साहू—को गिरफ्तार किया गया था । वाहन की तलाशी लेने पर पुलिस ने तीन प्लास्टिक की बोरियों में भरी हुई 820 शीशी (प्रत्येक 100 ML) ‘विंग्स’ कंपनी की नशीली कोडिनयुक्त कफ सीरप बरामद की ।

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जांच में सामने आई दीपेश साहू की संलिप्तता

मामले की विवेचना के दौरान सह-आरोपी अंकुश साहू के मेमोरंडम कथन के आधार पर दीपेश साहू का नाम सामने आया । जांच में पाया गया कि दीपेश ने अन्य साथियों के साथ मिलकर इस नशीली खेप को बोलेरो में लोड कराया था । इसके अलावा, पुलिस द्वारा प्रस्तुत सीडीआर (CDR) और कैफ (CAF) रिपोर्ट ने भी अपराध में दीपेश की संलिप्तता के पुख्ता संकेत दिए ।

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न्यायालय ने क्यों ठुकराई जमानत?

आरोपी की ओर से दलील दी गई कि वह निर्दोष है और उसे केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर फंसाया गया है । लेकिन न्यायाधीश उमेश कुमार सोनी ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना और फैसले में निम्नलिखित बिंदुओं को आधार बनाया:

  • वाणिज्यिक मात्रा (Commercial Quantity): जप्त की गई कफ सीरप की कुल मात्रा 82 लीटर (या 82 किलोग्राम) है । एनडीपीएस एक्ट के तहत यह ‘वाणिज्यिक मात्रा’ की श्रेणी में आती है, जो एक अत्यंत गंभीर श्रेणी का अपराध है ।
  • धारा 37 के कड़े प्रावधान: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 (1)(ख) के तहत वाणिज्यिक मात्रा वाले मामलों में जमानत तभी दी जा सकती है जब कोर्ट को यह विश्वास हो कि आरोपी निर्दोष है और भविष्य में अपराध नहीं करेगा । वर्तमान तथ्यों के आधार पर कोर्ट ऐसा मानने को तैयार नहीं था ।
  • अपराधिक इतिहास: रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी दीपेश साहू का पहले भी अपराधिक इतिहास रहा है, जिससे उसके दोबारा अपराध में लिप्त होने की आशंका बनी रहती है ।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि समाज में फैलते नशे के जाल और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देना न्यायोचित नहीं होगा । इसी के साथ, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बी.एन.एस.एस.), 2023 की धारा 483 के तहत प्रस्तुत इस प्रथम जमानत याचिका को गुण-दोष के आधार पर निरस्त कर दिया गया ।

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