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मोरवा पुलिस को तगड़ा झटका 7 साल बाद भी अन्नू खान सहित सभी आरोपी हुए बरी

By: डिजिटल डेस्क

On: Tuesday, May 12, 2026 2:04 AM

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singrauli-court-acquits-essential-commodities-act-case-morwa-सिंगरौली जिले के वैढन स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) से जुड़े एक पुराने मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप प्रमाणित न कर पाने के कारण सभी अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया है ।

2017 से चल रहा था कानूनी विवाद

यह मामला वर्ष 2017 का है, जब थाना मोरवा में आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 438/2017 के तहत मामला दर्ज किया गया था । पुलिस ने अभियुक्तों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत कार्यवाही की थी । इस मामले में अन्नू खान उर्फ मोहम्मद हारून (58 वर्ष) सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था ।

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पुलिस का आरोप था कि अभियुक्तों ने आवश्यक वस्तुओं के नियमन और वितरण प्रणाली में अनियमितता बरती थी । मामला दर्ज होने के बाद 19 दिसंबर, 2018 को न्यायालय में इसका रजिस्ट्रेशन हुआ और तब से इस पर लंबी कानूनी प्रक्रिया चल रही थी ।

न्यायालय का विश्लेषण: क्यों मिली दोषमुक्ति?

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवचरण पटेल की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा । विचारण के दौरान न्यायालय ने पाया कि:

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  • साक्ष्यों का अभाव: अभियोजन द्वारा प्रस्तुत गवाह और साक्ष्य आरोपों की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त नहीं थे ।
  • वाहन और सामग्री की स्थिति: प्रकरण के दौरान जप्त किए गए वाहन (पिकअप यू.पी.-64टी-5086 और स्कॉर्पियो यू.पी.-64एन-7034) को लेकर भी लंबी कानूनी प्रक्रिया चली 。 पूर्व में कलेक्टर न्यायालय द्वारा जारी आदेश को अपील के माध्यम से चुनौती दी गई थी, जिसे अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए प्रकरण को रिमांड किया था ।
  • राजीनामा और कानूनी स्थिति: मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के सूक्ष्म परीक्षण के बाद अदालत ने पाया कि दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं हैं ।

अंतिम निर्णय और जप्त सामग्री की स्थिति

05 मई, 2026 को सुनाए गए अपने अंतिम फैसले में न्यायालय ने सभी अभियुक्तों को ससम्मान बरी कर दिया । न्यायालय ने यह भी निर्देशित किया कि अपील की अवधि समाप्त होने के पश्चात जप्तशुदा सामग्री और वाहनों के सुपुर्दनामा (Bond) को भारमुक्त समझा जाए ।

यह फैसला उन व्यापारियों और लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो पिछले सात वर्षों से इस कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे थे। निर्णय की प्रति मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवचरण पटेल के निर्देशन में तैयार कर खुले न्यायालय में घोषित की गई 。

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