वैढ़न (सिंगरौली)। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिला न्यायालय से एक महत्वपूर्ण कानूनी अपडेट सामने आया है। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार खरादी की अदालत ने एक आपराधिक मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी राजेश कुमार साकेत को सशर्त नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया है। न्यायालय ने यह फैसला आरोपी द्वारा प्रस्तुत तीसरी जमानत याचिका पर उभय पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद सुनाया। इससे पूर्व आरोपी की ओर से पेश की गई प्रथम और द्वितीय जमानत याचिकाएं बल न दिए जाने के कारण निरस्त कर दी गई थीं।
यह मामला सिंगरौली जिले के आरक्षी केंद्र (पुलिस थाना) मोरवा में दर्ज आपराधिक प्रकरण क्रमांक 1611/2025 से जुड़ा हुआ है, जो वर्तमान में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सिंगरौली के समक्ष विचारण के अधीन है।
पंखा लगाने के विवाद में अपनों पर ही दर्ज कराया था केस, अब न्यायालय ने किया दोषमुक्त
कोर्ट ने क्यों दी जमानत? जानिए कानूनी आधार
आवेदक/अभियुक्त राजेश कुमार साकेत (उम्र 32 वर्ष, निवासी ग्राम बगदरी, थाना बरगवां) की ओर से उनके अधिवक्ता श्री नसीमुद्दीन अंसारी ने अदालत के समक्ष पैरवी की। सुनवाई के दौरान अदालत ने जमानत मंजूर करने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित विधिक बिंदुओं को आधार माना:
- समानता का सिद्धांत (Parity Principle): न्यायालय ने पाया कि इस मामले से जुड़े अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत पर रिहा किया जा चुका है। वर्तमान आवेदक राजेश कुमार साकेत का मामला भी जमानत पर छूटे अन्य आरोपियों से भिन्न नहीं था। कानून के अनुसार, परिस्थितियों में समानता होने के कारण आवेदक को भी राहत का हकदार माना गया।
- अनिश्चितकालीन हिरासत का औचित्य नहीं: अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विचारण के दौरान आरोपी को अनिश्चितकाल के लिए न्यायिक अभिरक्षा में रखा जाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है।
न्यायालय का आदेश: “प्रकरण में प्रथम दृष्टया उपलब्ध समस्त तथ्यों, परिस्थितियों एवं समानता के आधार को दृष्टिगत रखते हुए आवेदक/अभियुक्त राजेश कुमार साकेत को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 के तहत सशर्त जमानत पर छोड़ा जाना उचित प्रतीत होता है।”
ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामला राष्ट्रपति और CJI की चौखट पर पहुंचा परिवार न्यायिक दखल की मांग
जमानत के लिए कोर्ट द्वारा लगाई गई कड़े विधिक शर्तें
पंचम अपर सत्र न्यायाधीश ने विचारण न्यायालय की संतुष्टि योग्य राशि 25,000 रुपये की सक्षम जमानत और इतनी ही राशि का व्यक्तिगत बंध पत्र (पर्सनल बॉन्ड) प्रस्तुत करने पर रिहाई के आदेश दिए। इसके साथ ही आरोपी पर कुछ कड़े प्रतिबंध भी लगाए गए हैं:
- अपराध की पुनरावृत्ति पर रोक: आवेदक प्रकरण के लंबित रहने के दौरान इस प्रकृति के किसी भी अपराध को दोबारा नहीं दोहराएगा।
- साक्ष्यों की सुरक्षा: आरोपी अभियोजन पक्ष के गवाहों को किसी भी रूप में प्रभावित या डराने-धमकाने का प्रयास नहीं करेगा।
- न्यायिक सहयोग: आरोपी को मुकदमे के विचारण में पूरा सहयोग करना होगा और न्यायालय में नियत प्रत्येक पेशी पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा।
अदालत ने इस आदेश के साथ ही विचारण न्यायालय का मूल अभिलेख आवश्यक कार्यवाही के लिए वापस भेज दिया है और केस का परिणाम सीआईएस (CIS) सॉफ्टवेयर में दर्ज कर पत्रावली को अभिलेखागार में दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।







