कोलकाता/नई दिल्ली- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण ने भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है। कल संपन्न हुए मतदान में राज्य के मतदाताओं ने अभूतपूर्व उत्साह दिखाते हुए 92.72% का ऐतिहासिक टर्नआउट दर्ज किया। यह आंकड़ा न केवल राज्य के पिछले रिकॉर्ड्स को तोड़ता है, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है। इस भारी मतदान की सराहना करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इसे ‘भारतीय लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण’ बताया है।
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चुनाव आयोग का कड़ा फैसला-SD कार्ड पर नया नियम
भारी मतदान और संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। आयोग द्वारा आज जारी नए निर्देश के अनुसार, अब मतदान खत्म होने के तुरंत बाद कैमरों से SD कार्ड नहीं निकाले जा सकेंगे।
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आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये कार्ड अब सेक्टर ऑफिसर की सीधी निगरानी में रहेंगे और इन्हें केवल मतगणना केंद्र या अधिकृत स्ट्रॉन्ग रूम में ही सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत खोला जाएगा। इस कदम का उद्देश्य डेटा के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना को शून्य करना है।
आंकड़ों में मतदान की तस्वीर
कुल मतदान प्रतिशत- 92.72%
पिछला औसत (2021)- लगभग 82%
महिला मतदाताओं की भागीदारी- 93.5% (अनुमानित)
तमिलनाडु से बड़ी मांग-टीवीके प्रमुख विजय का प्रस्ताव
इसी चुनावी गहमागहमी के बीच तमिलनाडु से भी एक बड़ी खबर आई है। तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) के प्रमुख और अभिनेता विजय ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर एक महत्वपूर्ण मांग की है। उन्होंने अपील की है कि चिलचिलाती गर्मी और मतदाताओं की लंबी कतारों को देखते हुए मतदान का समय 2 घंटे और बढ़ाया जाए। विजय का तर्क है कि शाम के वक्त भीड़ बढ़ने से कई मतदाता बिना वोट दिए लौट जाते हैं, समय बढ़ने से भागीदारी और बढ़ेगी।पश्चिम बंगाल के इस रिकॉर्ड तोड़ मतदान ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। अब सभी की निगाहें अगले चरणों और सुरक्षा इंतजामों पर टिकी हैं।







